कन्नूर के श्रीकंडपुरम में लैटेराइट खदान के खिलाफ चल रहे 17 दिनों के अनशन को जिला कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद समाप्त कर दिया गया है। कलेक्टर ने खदान संचालन पर अस्थायी रोक का आदेश दिया है, जिससे स्थानीय आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
मुख्य बातें
- कन्नूर जिला कलेक्टर ने लैटेराइट खदान के संचालन पर अस्थायी रोक का आदेश दिया है।
- आदिवासी समुदाय के सदस्यों ने 17 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।
- खदान के कारण 50 अनुसूचित जनजाति परिवारों और उनके सामुदायिक संसाधनों को खतरा था।
- जांच में पाया गया कि खदान एक सार्वजनिक सड़क के 50 मीटर के दायरे में स्थित है।
कन्नूर के श्रीकंडपुरम नगर पालिका के समीप थोपिलायी में अनुसूचित जनजाति की बस्ती के निवासियों ने रविवार को लैटेराइट खदान के खिलाफ अपने 17 दिवसीय विरोध प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। यह निर्णय जिला कलेक्टर पी. विष्णुराज द्वारा खदान के संचालन पर अस्थायी रोक (Stop Memo) जारी करने के बाद लिया गया।
विरोध समिति की संयोजिका पी. बिंदु, जो नौ दिनों से उपवास पर थीं, और उरु मूप्पन पी. अनीश ने अपना अनशन समाप्त किया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक निजी व्यक्ति ने भूमिहीन परिवारों के लिए आवंटित भूमि का उपयोग करके जाली दस्तावेजों के माध्यम से खनन की अनुमति प्राप्त कर ली है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में कॉर्पोरेट हितों और आदिवासी अधिकारों के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाता है। खदान के कारण न केवल 50 अनुसूचित जनजाति परिवारों का अस्तित्व खतरे में था, बल्कि उनके श्मशान घाट, सामुदायिक भवन और पेयजल टैंक जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की आशंका थी।
पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के बीच का यह संघर्ष विकास की परिभाषा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि खदान एक सार्वजनिक सड़क के 50 मीटर के दायरे के भीतर स्थित है, जो नियमों का उल्लंघन है। इससे पहले, खदान मालिकों ने उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए पुलिस सुरक्षा के बीच खनन कार्य फिर से शुरू कर दिया था, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
स्थानीय निवासियों के अनुसार, 2023 से इस क्षेत्र में लैटेराइट खनन के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन जनता के कड़े विरोध के कारण इन्हें छोड़ दिया गया था। बाद में, कानूनी लड़ाई के माध्यम से खदान मालिकों ने फिर से काम शुरू करने की कोशिश की, जिसने इस लंबे विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. अनशन क्यों समाप्त किया गया?
जिला कलेक्टर द्वारा खदान के संचालन पर अस्थायी रोक का आदेश जारी करने के बाद अनशन समाप्त किया गया।
2. ग्रामीणों को किन खतरों का सामना करना पड़ रहा था?
ग्रामीणों को अपने घरों, पेयजल टैंक, सामुदायिक भवन और श्मशान घाट के नष्ट होने का डर था।