केरल के इडुक्की स्थित मालांकर बांध की भंडारण क्षमता लगभग आधी रह गई है, जिससे थोडुपुझा और मुवात्तुपुझा नदियों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
मुख्य बातें
- मालांकर बांध की 48.95% भंडारण क्षमता गाद (silt) से भर चुकी है।
- गाद के कारण बांध का जल स्तर प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण मुश्किल हो गया है।
- सरकार ने 8 किलोमीटर लंबे क्षेत्र से गाद निकालने का निर्णय लिया है।
- यह परियोजना तीन साल में पूरी होने की उम्मीद है।
केरल के इडुक्की जिले में स्थित मालांकर बांध वर्तमान में एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। मुवात्तुपुझा घाटी सिंचाई परियोजना (MVIP) का हिस्सा यह बांध, अपनी भंडारण क्षमता का लगभग आधा हिस्सा गाद (silt) के कारण खो चुका है। एक 2021 के अध्ययन के अनुसार, जलाशय की कुल क्षमता का 48.95% हिस्सा अब मिट्टी और गाद से भरा हुआ है।
यह स्थिति थोडुपुझा और मुवात्तुपुझा नदियों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय है। बांध की क्षमता कम होने के कारण, भारी बारिश के दौरान जल स्तर को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। यदि बांध में पानी का स्तर बढ़ता है, तो उसे सुरक्षित रूप से छोड़ना कठिन होता है, जिससे नदियों में अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बांधों में गाद का जमा होना केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव जीवन और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जुड़ा है। मालांकर बांध मुख्य रूप से मूलामट्टम पावरहाउस से निकलने वाले 'टेलरेस' पानी को संग्रहीत करता है। जब बिजली की मांग अधिक होती है, तो बिजली उत्पादन बढ़ता है, जिससे बांध में पानी का प्रवाह अनियंत्रित हो जाता है।
गाद के कारण जलाशय की क्षमता घटने से बाढ़ प्रबंधन की रणनीतियां पूरी तरह से विफल हो सकती हैं।
इस संकट से निपटने के लिए, अधिकारियों ने बांध के ऊपर की ओर 8 किलोमीटर लंबे क्षेत्र से गाद निकालने (desilting) का निर्णय लिया है। इस परियोजना के तहत कांजार पुल तक के हिस्से को साफ किया जाएगा। इस कार्य को पूरा करने में लगभग तीन साल का समय लगने की उम्मीद है, और इस प्रक्रिया में निकाली गई रेत के बदले ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मालांकर बांध एक विचलन बांध (diversion dam) के रूप में कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य इडुक्की जलाशय से बिजली उत्पादन के बाद निकलने वाले पानी को प्रबंधित करना है। समय के साथ, नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी ने जलाशय के तल को ऊपर उठा दिया है, जिससे इसकी गहराई और भंडारण क्षमता दोनों कम हो गई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: गाद जमा होने से क्या खतरा है?
उत्तर: इससे बांध की पानी रोकने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे भारी बारिश के दौरान अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रश्न 2: गाद निकालने की योजना क्या है?
उत्तर: सरकार 8 किमी के क्षेत्र से गाद निकालने की योजना बना रही है, जिसे 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य है।