असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में दुनिया की पहली बार कृत्रिम रूप से प्रजनन किए गए स्लींडर-बिल्ड गिद्धों को जंगल में छोड़ा गया। यह कदम लुप्तप्राय गिद्धों की आबादी को बचाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
मुख्य बातें
- दुनिया में पहली बार स्लींडर-बिल्ड गिद्धों (Slender-billed vultures) को कृत्रिम प्रजनन के बाद जंगल में छोड़ा गया।
- बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने काजीरंगा में 10 गिद्धों को मुक्त किया।
- पशु चिकित्सा दर्द निवारक दवाओं के कारण भारत में गिद्धों की आबादी में 99% की गिरावट आई है।
असम के काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में एक अभूतपूर्व संरक्षण सफलता दर्ज की गई है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) द्वारा रानी (गुवाहाटी के पास) स्थित संरक्षण केंद्र में पाले गए स्लींडर-बिल्ड गिद्धों (Gyps tenuirostris) को पहली बार दुनिया में इस प्रजाति के रूप में जंगली वातावरण में छोड़ा गया है।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान, पांच स्लींडर-बिल्ड गिद्धों और पांच व्हाइट-रम्प्ड गिद्धों को जटायु सॉफ्ट रिलीज सेंटर में मुक्त किया गया। इन पक्षियों को तीन महीने पहले ही अनुकूलन (acclimatization) के लिए बिस्वनाथ के तेवारिपाल क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस अवसर पर असम के पर्यावरण और वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआह भी उपस्थित थे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बहाल करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गिद्ध प्रकृति के 'सफाईकर्मी' हैं, जो मृत जानवरों के अवशेषों को खाकर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। पिछले 20 वर्षों में, पशुओं में इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक दवाओं (जैसे डिक्लोफेनाक) के कारण भारत में गिद्धों की आबादी में 99% की भारी गिरावट आई है।
"यह दुनिया में पहली बार स्लींडर-बिल्ड गिद्धों की कृत्रिम प्रजनन से रिहाई है, जो संरक्षण प्रयासों में एक बड़ी जीत है।" - सचिन रनाडे, उप निदेशक, BNHS
असम में 2018 से अब तक लगभग 700 से अधिक गिद्ध जहरीले कीटनाशकों या प्रतिबंधित दवाओं के कारण मारे जा चुके हैं। वन्यजीव अधिकारी अब स्थानीय समुदायों को जागरूक करने पर जोर दे रहे हैं ताकि वे मृत जानवरों पर कीटनाशकों का छिड़काव न करें और प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को बाधित न करें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गिद्धों की आबादी में गिरावट का मुख्य कारण पशु चिकित्सा में उपयोग होने वाली दवाएं थीं। हालांकि सरकार ने डिक्लोफेनाक, एसेक्लोफेनाक, केटोप्रोफेन और निमेसुलाइड जैसी दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन अवैध उपयोग और कीटनाशकों से होने वाला जहर अभी भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: गिद्धों की आबादी क्यों कम हो रही है?
उत्तर: मुख्य रूप से पशुओं के इलाज में उपयोग होने वाली प्रतिबंधित दर्द निवारक दवाओं (जैसे डिक्लोफेनाक) के कारण।
प्रश्न 2: इस रिहाई का स्थान क्या है?
उत्तर: असम का काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व।