पूर्व वन सचिव ए.एन. यल्लाप्पा रेड्डी ने कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित 5% पार्क भूमि प्रावधान का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह संशोधन पारिस्थितिक तंत्र के लिए घातक हो सकता है।
- पूर्व वन सचिव ए.एन. यल्लाप्पा रेड्डी ने पार्क भूमि के 5% उपयोग के प्रस्ताव का विरोध किया।
- चेतावनी दी गई है कि यह संशोधन अन्य बड़े विकास कार्यों के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकता है।
- लालबाग जैसे ऐतिहासिक पार्कों की पारिस्थितिक अखंडता पर संकट की आशंका।
- कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
कर्नाटक के पूर्व वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण सचिव ए.एन. यल्लाप्पा रेड्डी ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण संशोधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्य सचिव से कर्नाटक सरकार पार्क (संरक्षण) अधिनियम, 1975 में किए जाने वाले बदलावों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत संरक्षित पार्क भूमि का 5% हिस्सा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उपयोग करने की अनुमति देने की बात कही गई है। श्री रेड्डी ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि यह कदम केवल एक छोटा सा प्रतिशत नहीं है, बल्कि यह भविष्य में पार्कों के बड़े हिस्सों को व्यावसायिक या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए खोलने का एक खतरनाक रास्ता खोल सकता है।
पारिस्थितिक संतुलन पर मंडराता खतरा
लालबाग जैसे प्रतिष्ठित पार्कों का उदाहरण देते हुए, श्री रेड्डी ने कहा कि किसी पार्क के महत्व को केवल उसकी एकड़ या प्रतिशत के आधार पर नहीं आंका जा सकता। उन्होंने रेखांकित किया कि लालबाग की असली पहचान वहां के पुराने पेड़, मिट्टी की गुणवत्ता, जल प्रणाली, जैव विविधता और बागवानी विरासत में निहित है।
पार्क भूमि का 5% हिस्सा बुनियादी ढांचे को देना एक ऐसा उदाहरण पेश करेगा जिससे भविष्य में पार्कों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस प्रस्ताव के पीछे कोई वैज्ञानिक अध्ययन या पारिस्थितिकीविदों, बागवानों और शहरी योजनाकारों की कोई ठोस सिफारिश है? उन्होंने सरकार से मांग की है कि वे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), वैकल्पिक मार्गों और वृक्ष एवं जैव विविधता अध्ययनों की गहन समीक्षा करें।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरीकरण की दौड़ में अक्सर 'हरित क्षेत्रों' को विकास की वेदी पर चढ़ा दिया जाता है। यदि 5% का यह प्रावधान कानून बन जाता है, तो यह अन्य राज्यों और शहरों के लिए भी एक कानूनी मिसाल (Precedent) बन जाएगा, जिससे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह नष्ट हो सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कर्नाटक में पार्कों का संरक्षण दशकों पुराने कानूनों द्वारा किया जाता रहा है। लालबाग जैसे उद्यान न केवल शहर के फेफड़े हैं, बल्कि वे ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व के केंद्र भी हैं। पूर्व में, वीर साउधा के निर्माण के प्रस्ताव को भी लालबाग की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए पुनर्विचार के बाद स्थानांतरित कर दिया गया था।
Frequently Asked Questions
1. प्रस्तावित संशोधन क्या है?
सरकार पार्क भूमि का 5% हिस्सा बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए उपयोग करने की अनुमति देने वाला संशोधन चाहती है।
2. ए.एन. यल्लाप्पा रेड्डी ने क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि यह संशोधन भविष्य में पार्कों के बड़े हिस्से को छीनने का आधार बन सकता है और वे इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकते हैं।