सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) ने काजीरंगा नेशनल पार्क के दक्षिणी सीमा पर खनन रोकने में असम सरकार की विफलता पर कड़ी नाराजगी जताई है। समिति ने वन्यजीव गलियारों और जल निकासी प्रणालियों की सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया है।

  • सुप्रीम कोर्ट की समिति (CEC) ने काजीरंगा के पास खनन रोकने में असम सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।
  • पार्क के दक्षिणी हिस्से में अवैध खनन और वन्यजीव गलियारों (Animal Corridors) की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
  • समिति ने राज्य सरकार से जल निकासी विश्लेषण रिपोर्ट और वन्यजीव प्रबंधन योजना तत्काल लागू करने की मांग की है।

काजीरंगा नेशनल पार्क के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के संघर्ष के बीच एक बड़ी कानूनी बाधा सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) ने असम सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि सरकार काजीरंगा के दक्षिणी सीमा पर हो रहे खनन के मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है। यह मामला तब और संवेदनशील हो गया है जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पार्क के 'इको-सेंसिटिव ज़ोन' को कम करने का प्रस्ताव दिया था।

समिति के अनुसार, पार्कुप पहाड़ रेंज, जो एक घोषित वन्यजीव अभयारण्य और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारा है, वहां खनन गतिविधियां जारी हैं। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के 2019 के उस आदेश का सीधा उल्लंघन है, जिसमें काजीरंगा की दक्षिणी सीमा और कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में सभी प्रकार के खनन कार्यों पर रोक लगा दी गई थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि काजीरंगा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह दुनिया के एक सींग वाले गैंडों का सबसे महत्वपूर्ण आवास है। यदि खनन और अनियंत्रित निर्माण के कारण प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था (Natural Drainage System) बाधित होती है, तो बाढ़ के दौरान जानवरों के पास सुरक्षित शरण लेने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियाँ इन जानवरों के लिए 'सुरक्षित आश्रय' का काम करती हैं, जिन्हें अब खनन के कारण खतरा है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली और पशु गलियारों की अखंडता बनाए रखना अनिवार्य है, अन्यथा पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर एक आरटीआई (RTI) से इस मामले की परतें खुली हैं। आरटीआई के माध्यम से यह खुलासा हुआ कि CEC द्वारा मांगी गई 'वॉटरशेड ड्रेनेज एनालिसिस रिपोर्ट' अभी तक जमा नहीं की गई है। इसके अलावा, नौ चिन्हित पशु गलियारों (Animal Corridors) को अधिसूचित करने में भी राज्य सरकार विफल रही है।

समिति ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। CEC ने कहा कि KAAC अदालतों को स्थिति का सही चित्र पेश नहीं कर रहा है और हाथी रिजर्व के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति दी जा रही है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष और हाथियों की मृत्यु की घटनाएं बढ़ रही हैं।

Did You Know?: काजीरंगा के जानवर बाढ़ के समय कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों की ओर पलायन करते हैं, जो उनके लिए जीवन रक्षक ऊंचे क्षेत्र हैं।

Frequently Asked Questions

1. सुप्रीम कोर्ट ने काजीरंगा के संबंध में क्या आदेश दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में काजीरंगा की दक्षिणी सीमा और संबंधित नदी घाटियों में सभी खनन और नए निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

2. CEC की मुख्य चिंता क्या है?
CEC की मुख्य चिंता अवैध खनन, अधूरे जल निकासी विश्लेषण और पशु गलियारों को अधिसूचित न करना है, जो वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए खतरा है।