बेलगावी के रामदुर्ग तालुकात में वन भूमि के अवैध उपयोग को लेकर केंद्र सरकार ने कर्नाटक सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। मंत्रालय ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

  • केंद्र सरकार ने बेलगावी के रामदुर्ग में वन अधिनियम के उल्लंघन पर राज्य से जवाब मांगा है।
  • दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
  • 2018 में खारिज किए गए प्रस्ताव के बावजूद वन भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां जारी हैं।
  • एक बड़ी धार्मिक प्रतिमा और कॉलेज निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

नई दिल्ली/बेलगावी: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बेलगावी जिले के रामदुर्ग तालुकात में वन अधिनियम के प्रावधानों के गंभीर उल्लंघन को लेकर कर्नाटक राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। यह दूसरी बार है जब केंद्र ने इस मामले में राज्य से विस्तृत जानकारी और जवाबदेही मांगी है।

मंत्रालय के अधिकारियों ने स्थानीय वन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारी उल्लंघन को रोकने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। यह पूरा विवाद श्री शारदा देवी एजुकेशन सोसाइटी द्वारा रामदुर्ग के डोड्डामागाडी में 0.9648 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्ट करने के प्रस्ताव से जुड़ा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल भूमि अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का भी है। यदि वन भूमि के लिए स्वीकृत प्रस्तावों को खारिज करने के बाद भी वहां निर्माण कार्य जारी रहता है, तो यह वन विभाग की निगरानी प्रणाली पर बड़े प्रश्नचिह्न लगाता है।

वन भूमि का अवैध उपयोग न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह सरकारी नियमों और प्रशासनिक अखंडता को भी चुनौती देता है।

मंत्रालय ने पाया कि 2018 में क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद उस भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां की गईं। केंद्र ने अब यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब प्रस्ताव पहले ही खारिज हो चुका था, तो दोबारा उसी पर विचार क्यों किया जा रहा है? इसके अलावा, मंत्रालय ने डोड्डामागाडी ट्री पार्क की सीमाओं का विवरण देने वाली KML (Keyhole Marker Language) फाइल भी मांगी है।

मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक ही पते पर पंजीकृत संस्थाओं द्वारा दो अलग-अलग वन डायवर्जन प्रस्ताव पेश किए गए हैं। केंद्र ने पूछा है कि इन्हें एक एकीकृत प्रस्ताव के बजाय दो अलग-अलग प्रस्तावों के रूप में क्यों प्रस्तुत किया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस विवाद की जड़ें 2017-18 में हैं, जब निर्माण कार्य शुरू होने पर वन अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी और शिक्षा समाज के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। विवाद का एक मुख्य केंद्र 72 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा का निर्माण भी है, जिसका अनावरण 2018 में किया गया था।

क्या आप जानते हैं?: वन भूमि का डायवर्जन केवल सरकार की अनुमति से ही हो सकता है; बिना अनुमति के किया गया कोई भी निर्माण कानूनी रूप से अपराध है।

Frequently Asked Questions

1. केंद्र सरकार ने किन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है?
केंद्र ने मुख्य वन संरक्षक से लेकर रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) तक के स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

2. रामदुर्ग मामले में मुख्य विवाद क्या है?
मुख्य विवाद खारिज किए गए प्रस्ताव के बावजूद वन भूमि पर कॉलेज भवन और एक विशाल प्रतिमा का निर्माण करना है।