जनसेना पार्टी एमएलसी कोनिडेला नागबाबू ने आंध्र प्रदेश ग्रीन एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष के रूप में शपथ ली है। उनका लक्ष्य 2047 तक राज्य के हरित आवरण को वर्तमान 22.96% से बढ़ाकर 50% करना है।

  • कोनिडेला नागबाबू ने आंध्र प्रदेश ग्रीन एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष का पदभार संभाला।
  • लक्ष्य: वर्ष 2047 तक राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 50% हिस्सा हरित आवरण में बदलना।
  • वर्तमान वन क्षेत्र केवल 22.96% है, जिसे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
  • यह एक जन आंदोलन बनेगा जिसमें किसान, छात्र और कॉर्पोरेट क्षेत्र शामिल होंगे।

जनसेना पार्टी (JSP) के एमएलसी कोनिडेला नागबाबू ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश ग्रीन एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। मंगलगिरी स्थित अरण्य भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने राज्य की पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक आंध्र प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 50% हिस्से को हरित आवरण में परिवर्तित करना है।

नागबाबू ने वर्तमान आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश का वन क्षेत्र केवल 22.96% है। इस अंतर को पाटने के लिए, उन्होंने केवल वनों पर ही नहीं, बल्कि कृषि भूमि, गांवों, शहरी क्षेत्रों, सड़कों के किनारे, नहरों के किनारों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी व्यापक वृक्षारोपण की योजना बनाई है। उन्होंने सरकारी और निजी संस्थानों के परिसरों और उपयुक्त बंजर भूमि का उपयोग करने पर भी जोर दिया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की जलवायु लचीलापन (climate resilience) और दीर्घकालिक सतत विकास के लिए एक रणनीतिक कदम है। बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच, हरित आवरण का विस्तार जल स्तर बनाए रखने और तापमान नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

"केवल पेड़ लगाना हमारा उद्देश्य नहीं है; उनकी उत्तरजीविता, सुरक्षा और स्वस्थ विकास सुनिश्चित करना हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है।"

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागबाबू ने अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी, पंचायत राज, शिक्षा, उद्योग, राजस्व, जल संसाधन, परिवहन और वन विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इस मिशन को एक 'जन आंदोलन' बनाने का आह्वान किया, जिसमें किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, छात्र समूहों, युवाओं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश ऐतिहासिक रूप से अपनी विविध जैव विविधता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में कृषि विस्तार और शहरीकरण के कारण वन क्षेत्र में कमी देखी गई है। 2047 का लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जो एक 'हरित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

नागबाबू ने यह भी घोषणा की कि पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा। यह तंत्र केवल वृक्षारोपण के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि लगाए गए पेड़ों के जीवित रहने की दर और उनके स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करेगा। कार्यभार संभालने के बाद, उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण का इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए आभार व्यक्त किया।

Did You Know?: आंध्र प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने के लिए केवल वन ही नहीं, बल्कि नहरों के किनारे और बंजर भूमि का भी रणनीतिक उपयोग किया जाएगा।

Frequently Asked Questions

1. आंध्र प्रदेश का वर्तमान वन आवरण कितना है?
वर्तमान में आंध्र प्रदेश का वन आवरण लगभग 22.96% है।

2. ग्रीन एग्जीक्यूटिव कमेटी का मुख्य लक्ष्य क्या है?
मुख्य लक्ष्य वर्ष 2047 तक राज्य के हरित आवरण को बढ़ाकर 50% करना है।