नेपाल के रासुवा में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। भारत ने एहतियात के तौर पर हिमाचल, सिक्किम और उत्तराखंड सहित 195 जोखिमपूर्ण ग्लेशियर झीलों की पहचान की है।

  • नेपाल के रासुवा में ग्लेशियर के ढहने से भीषण बाढ़ आई।
  • भारत ने 195 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों को चिन्हित किया है।
  • ISRO और CWC जैसे संस्थान निगरानी कर रहे हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास नेपाल के रासुवा क्षेत्र में एक ग्लेशियर के ढहने से आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में 'कैस्केडिंग खतरों' (एक के बाद एक आने वाली आपदाओं) के जोखिम को दुनिया के सामने ला दिया है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ का एक छोटा सा हिस्सा भी टूटना पूरे क्षेत्र के लिए तबाही का कारण बन सकता है।

इस बढ़ती угро के जवाब में, भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश के विभिन्न राज्यों में 195 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की पहचान की है। ये झीलें हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड जैसे महत्वपूर्ण पहाड़ी राज्यों में स्थित हैं।

निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग

भारत इन खतरों से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के उपग्रहों का उपयोग रिमोट सेंसिंग और इलाके के मानचित्रण के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही, मौसम विभाग के मौसम मॉडल नदी उप-बेसिनों के लिए सटीक वर्षा पूर्वानुमान प्रदान करते हैं, जबकि केंद्रीय जल आयोग (CWC) नदी गेज के माध्यम से 24 घंटे पहले बाढ़ की चेतावनी देने में सक्षम है।

हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में एक भी ग्लेशियर का ढहना विनाशकारी घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू कर सकता है, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही मच सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन चुनौती बन गया है। नेपाल की हालिया घटना ने उन निगरानी अंतराल (monitoring gaps) को उजागर किया है, जो उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ के अचानक ढहने के दौरान देखे जाते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: हिमालय दुनिया की सबसे युवा और अस्थिर पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। पिछले कुछ दशकों में, वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाओं में भारी वृद्धि देखी गई है, जो अचानक जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों के डूबने का कारण बनती हैं।

Did You Know?: ग्लेशियर झीलों का फटना (GLOF) अचानक आने वाली बाढ़ का सबसे खतरनाक रूप है, क्योंकि इसमें चेतावनी का समय बहुत कम मिलता है।

Frequently Asked Questions

1. भारत ने किन राज्यों में संवेदनशील झीलों की पहचान की है?
भारत ने हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड में संवेदनशील झीलों की पहचान की है।

2. बाढ़ की चेतावनी देने में कौन से संस्थान मदद करते हैं?
ISRO, मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग (CWC) बाढ़ की निगरानी और चेतावनी के लिए मुख्य संस्थान हैं।