कोयंबटूर कंज्यूमर कॉज ने मांग की है कि 200 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ केवल उन घरेलू उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए जिनका कुल बिजली उपभोग 500 यूनिट से कम है।

  • मुफ्त बिजली का लाभ केवल 500 यूनिट से कम कुल खपत वाले उपभोक्ताओं को मिले।
  • सोलर पैनल वाले घरों द्वारा ग्रिड से कम बिजली लेने पर सब्सिडी का अनुचित लाभ मिल रहा है।
  • कोयंबटूर कंज्यूमर कॉज ने सरकार से 'ग्रॉस कंजम्प्शन' के आधार पर पात्रता तय करने की अपील की है।

कोयंबटूर में सक्रिय एक प्रमुख उपभोक्ता निकाय, कोयंबटूर कंज्यूमर कॉज ने तमिलनाडु सरकार से बिजली सब्सिडी वितरण प्रणाली में सुधार करने का आग्रह किया है। निकाय का तर्क है कि वर्तमान में प्रदान की जाने वाली 200 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना का लाभ उन उपभोक्ताओं को मिल रहा है जो वास्तव में अधिक बिजली का उपयोग करते हैं, लेकिन सौर ऊर्जा के कारण उनके बिल में खपत कम दिखाई देती है।

सोलर पैनल और सब्सिडी का असंतुलन

वर्तमान बिलिंग प्रणाली 'नेट ग्रिड ड्रॉअल' (ग्रिड से ली गई शुद्ध बिजली) पर आधारित है। जब कोई घरेलू उपभोक्ता छत पर सौर पैनल (Rooftop Solar) लगाता है, तो उसकी वास्तविक खपत और ग्रिड से ली गई बिजली के बीच एक बड़ा अंतर आ जाता है। निकाय के सचिव के. कथिरमथियोन ने स्पष्ट किया कि यह प्रणाली उन लोगों के साथ अन्याय कर रही है जो सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं करते हैं।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई परिवार दो महीनों में 1,200 यूनिट बिजली खर्च करता है और 800 यूनिट सौर ऊर्जा से प्राप्त करता है, तो ग्रिड से केवल 400 यूनिट ली जाती है। इस स्थिति में, वह परिवार 200 यूनिट मुफ्त बिजली के लिए पात्र हो जाता है। इसके विपरीत, एक ऐसा परिवार जो सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं करता और 505 यूनिट बिजली खर्च करता है, वह इस लाभ से वंचित रह जाता है, जबकि उसकी वास्तविक खपत सोलर वाले परिवार से बहुत कम है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ऊर्जा सब्सिडी का वितरण निष्पक्ष होना चाहिए ताकि सरकारी राजस्व का सही उपयोग हो सके। यदि पात्रता का निर्धारण केवल 'नेट खपत' के आधार पर किया जाता है, तो यह उन उपभोक्ताओं के लिए एक 'लूपहोल' बन जाता है जो सौर ऊर्जा का उपयोग करके सब्सिडी का अनुचित लाभ उठा रहे हैं।

पात्रता का निर्धारण 'ग्रॉस कंजम्प्शन' (कुल खपत) के आधार पर होना चाहिए, जबकि टैरिफ गणना मौजूदा बिलिंग तंत्र के अनुसार ही जारी रह सकती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में विभिन्न राज्यों ने बिजली सब्सिडी को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक उपकरण बनाया है। तमिलनाडु सहित कई राज्यों में, निम्न-आय वाले परिवारों को राहत देने के लिए मुफ्त बिजली की योजनाएं लागू हैं। हालांकि, जैसे-जैसे सौर ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, सब्सिडी के वितरण के लिए अधिक सटीक और तकनीकी रूप से उन्नत मानदंडों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

Did You Know?: सौर ऊर्जा का उपयोग करने वाले घरों में ग्रिड पर निर्भरता कम होती है, जिससे बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) पर भार कम होता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उपभोक्ता निकाय क्या बदलाव चाहता है?
उत्तर: वे चाहते हैं कि मुफ्त बिजली की पात्रता 'कुल बिजली खपत' (Gross Consumption) के आधार पर तय हो, न कि केवल ग्रिड से ली गई शुद्ध बिजली के आधार पर।

प्रश्न 2: वर्तमान में सोलर पैनल वाले घरों को लाभ कैसे मिलता है?
उत्तर: सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली ग्रिड से ली गई बिजली में से घटा दी जाती है, जिससे उनकी 'नेट खपत' कम दिखती है और वे सब्सिडी के पात्र बन जाते हैं।