पुदुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने छात्रों से कैंपस में नशा विरोधी 'वॉचडॉग' बनने का आह्वान किया है। उन्होंने नशाखोरी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक 'साइलेंट महामारी' करार दिया है।

मुख्य बातें

  • उपराज्यपाल ने छात्रों को कैंपस का 'नैतिक संरक्षक' बनने का आह्वान किया।
  • नशाखोरी को 'साइलेंट महामारी' और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
  • 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए नशा मुक्त भारत को अनिवार्य बताया।
  • युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दी।

पुदुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने रविवार को पोंडिचेरी विश्वविद्यालय में आयोजित 'नशा मुक्त भारत अभियान' के दौरान छात्रों और युवा स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने परिसरों में नशा विरोधी लड़ाई के लिए 'वॉचडॉग' और 'नैतिक संरक्षक' की भूमिका निभाएं।

अपने संबोधन में, श्री कैलाशनाथन ने नशाखोरी को एक 'साइलेंट महामारी' करार दिया, जो न केवल व्यक्तिगत जीवन को बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को भी खतरे में डाल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की 40% जनसंख्या 15 से 35 वर्ष के बीच है, जो देश के विकास का 'इंजन' है। यदि यह युवा वर्ग नशे की चपेट में आता है, तो देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना चरमरा जाएगी। उपराज्यपाल ने चेतावनी दी कि नशीले पदार्थों की तस्करी से होने वाली अवैध कमाई का उपयोग संगठित अपराध और नार्को-आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

"विकसित भारत का निर्माण केवल बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और नशा मुक्त युवा पीढ़ी से संभव है।"

उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि नशे की लत अक्सर एक 'निर्दोष प्रयोग' या साथियों के दबाव (peer pressure) से शुरू होती है, जो बाद में एक गंभीर समस्या बन जाती है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने दोस्तों या रूममेट्स के व्यवहार में बदलाव देखते ही हस्तक्षेप करें और सोशल मीडिया के माध्यम से इस संदेश को फैलाएं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने 'नशा मुक्त भारत अभियान' (NMBA) की शुरुआत देश के युवाओं को ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव से बचाने के लिए की है। इसका उद्देश्य शिक्षण संस्थानों और समुदायों में जागरूकता पैदा करना और नशा मुक्ति के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।

क्या आप जानते हैं?: भारत की लगभग 40% आबादी युवा है, जो वैश्विक स्तर पर देश की सबसे बड़ी जनसांख्यिकीय शक्ति (Demographic Dividend) बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. उपराज्यपाल ने छात्रों को क्या भूमिका निभाने को कहा?
उन्होंने छात्रों को अपने परिसरों में नशा विरोधी 'वॉचडॉग' और 'नैतिक संरक्षक' बनने के लिए कहा है।

2. नशाखोरी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा क्यों है?
क्योंकि ड्रग तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग अक्सर नार्को-आतंकवाद और संगठित अपराध को वित्तपोषित करने के लिए किया जाता है।