कोझिकोड की पी. श्यामा ने अपने किराए के घर को 46 कुत्तों और 42 बिल्लियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बना दिया है। तमाम चुनौतियों और पड़ोसियों की शिकायतों के बावजूद, उनका पशु प्रेम अडिग है।

  • पी. श्यामा ने पिछले 19 वर्षों में सैकड़ों जानवरों को बचाया है।
  • वर्तमान में उनके पास 46 कुत्ते और 42 बिल्लियां हैं।
  • पड़ोसियों की शिकायतों के कारण उन्हें अब तक दो बार घर बदलना पड़ा है।
  • वह स्थानीय अधिकारियों से आवारा पशुओं के लिए भूमि आवंटित करने की मांग कर रही हैं।

केरल के कोझिकोड में स्थित बडीरूर के एक शांत इलाके में, एक किराए का घर अब केवल एक इमारत नहीं, बल्कि दर्जनों बेसहारा जीवों के लिए जीवनदान बन चुका है। 52 वर्षीय पी. श्यामा ने अपनी पूरी जिंदगी उन जानवरों को समर्पित कर दी है, जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया था। उनके इस छोटे से संसार में 46 कुत्ते और 42 बिल्लियां शामिल हैं, जिन्हें वह अपनी संतान की तरह मानती हैं।

जब आप इस घर के परिसर में प्रवेश करते हैं, तो कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आपका स्वागत करती है। लेकिन श्यामा का कहना है कि ये जानवर केवल अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, ये किसी को काटते नहीं हैं। यहाँ केवल स्वस्थ जानवर ही नहीं, बल्कि ट्रेन से घायल हुए, लकवाग्रस्त और ट्यूमर से जूझ रहे कुत्ते भी हैं, जिन्हें श्यामा की देखरेख में नया जीवन मिल रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में आवारा जानवरों का प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बन गया है। श्यामा जैसे व्यक्तिगत प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन वे सरकारी बुनियादी ढांचे की कमी को पूरी तरह से नहीं भर सकते। यह मामला व्यक्तिगत करुणा और सार्वजनिक नीति के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।

"मेरे लिए ये जानवर केवल पालतू नहीं, बल्कि मेरे बच्चों की तरह हैं, और मैं उनकी सेवा के लिए अपना सब कुछ समर्पित करने को तैयार हूँ।"

श्यामा का यह सफर उनकी माँ से प्रेरित है। उन्होंने एक सरकारी नौकरी तक छोड़ दी ताकि वे पूरी तरह से इस सेवा में लग सकें। उनके जीवन का एक दुखद मोड़ तब आया जब उनके घर के एक पालतू कुत्ते को लोगों ने गलती से पागल समझकर मार दिया। इस घटना ने उनके संकल्प को और भी मजबूत कर दिया।

ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियां

पिछले दो दशकों में, भारत के कई शहरों में आवारा कुत्तों की समस्या और उनके प्रबंधन को लेकर विवाद बढ़े हैं। श्यामा को भी इसी का सामना करना पड़ा है। शोर और गंध की शिकायतों के कारण उन्हें दो बार अपना ठिकाना बदलना पड़ा है। वर्तमान में, वह ₹9,000 मासिक किराए पर एक घर में रह रही हैं, जहाँ वह जानवरों के भोजन, स्नान और चिकित्सा का सारा खर्च स्वयं वहन करती हैं।

कोझिकोड नगर निगम की पशु चिकित्सा अधिकारी वी.एस. श्रीष्मा ने बताया कि प्रशासन अब आवारा कुत्तों के शेल्टर बनाने के लिए इच्छुक व्यक्तियों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से सहयोग की तलाश कर रहा है।

Did You Know?: केरल के कोझिकोड में पी. श्यामा जैसे व्यक्तिगत प्रयासों के कारण सैकड़ों बेसहारा जानवरों को मृत्यु के मुंह से बचाया जा सका है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: पी. श्यामा को किन मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर: उन्हें मुख्य रूप से पड़ोसियों की शिकायतों के कारण बार-बार घर बदलना पड़ता है और जानवरों के भोजन व चिकित्सा का भारी खर्च उठाना पड़ता है।

प्रश्न 2: स्थानीय प्रशासन इस समस्या का क्या समाधान कर रहा है?
उत्तर: कोझिकोड नगर निगम अब शेल्टर चलाने के लिए इच्छुक संगठनों से संपर्क कर रहा है और सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।