कोयंबटूर में संशोधित कृषि बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जहाँ किसानों ने अपनी मांगों की अनदेखी पर दुख जताया है, वहीं पंप और इंजीनियरिंग उद्योगों ने सिंचाई संबंधी घोषणाओं का स्वागत किया है।

मुख्य बातें

  • किसानों का आरोप है कि बजट कृषि के बजाय 'एग्री-बिजनेस' पर अधिक केंद्रित है।
  • उद्योग जगत ने सिंचाई और सूक्ष्म सिंचाई (micro-irrigation) के लिए किए गए आवंटन का स्वागत किया है।
  • कोयंबटूर में जैविक उत्पाद प्रमाणन केंद्र की मांग पूरी नहीं हुई।
  • पंप निर्माताओं ने ऊर्जा-कुशल पंपों पर सब्सिडी देने की मांग की है।

कोयंबटूर जिले के किसानों ने हाल ही में पेश किए गए संशोधित कृषि बजट पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। किसान संगठनों का कहना है कि बजट में उनकी बुनियादी जरूरतों और सुझावों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। 'तमिल विवसाईगल संगम' के जिला अध्यक्ष जी. रंगनाथन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार का ध्यान वास्तविक खेती के बजाय 'एग्री-बिजनेस' की ओर अधिक झुक गया है।

किसानों की मुख्य मांगें और कमियां

किसानों ने विशेष रूप से इस बात पर नाराजगी जताई कि कोयंबटूर में जैविक उत्पादों के प्रमाणन (organic certification) के लिए किसी कार्यालय की स्थापना की घोषणा नहीं की गई है। इसके अलावा, सौर पंपों के लिए की गई घोषणा को भी किसानों ने अपर्याप्त बताया है। किसानों का मानना है कि कृषि क्षेत्र को केवल एक व्यापार के रूप में देखा जा रहा है, न कि जीवन यापन के आधार के रूप में।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बजट का झुकाव औद्योगिक कृषि की ओर होना भविष्य में छोटे किसानों और पारंपरिक खेती के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर सकता है। यदि प्रमाणन जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर नहीं मिलती हैं, तो जैविक खेती का सपना अधूरा रह सकता है।

बजट में कृषि के व्यवसायीकरण और वास्तविक किसान कल्याण के बीच एक स्पष्ट असंतुलन दिखाई दे रहा है।

दूसरी ओर, साउदर्न इंडिया इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SIEMA) और इंडियन पंप मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IPMA) ने सरकार के कदमों का स्वागत किया है। सिंचाई दक्षता में सुधार और कृषि के लिए विश्वसनीय ऊर्जा सहायता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को उद्योग जगत ने सकारात्मक माना है।

उद्योग जगत का दृष्टिकोण

उद्योग जगत ने विशेष रूप से सूक्ष्म सिंचाई (micro-irrigation) के लिए ₹785 करोड़ के आवंटन की सराहना की है, जिससे लगभग 95,000 किसानों को लाभ होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सूक्ष्म सिंचाई की सफलता के लिए सही पंपों का होना अनिवार्य है। SIEMA के अध्यक्ष मिथुन रामदा और IPMA के अध्यक्ष के.वी. कार्तिक ने सुझाव दिया कि सब्सिडी योजना में ऊर्जा-कुशल पंपसेटों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

क्या आप जानते हैं?: सूक्ष्म सिंचाई तकनीक न केवल पानी बचाती है, बल्कि उर्वरकों के सटीक उपयोग में भी मदद करती है, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. किसानों ने बजट को निराशाजनक क्यों कहा?
क्योंकि बजट में जैविक प्रमाणन केंद्रों की कमी और सौर पंपों के लिए अपर्याप्त प्रावधान जैसे उनके प्रमुख सुझावों को शामिल नहीं किया गया है।

2. उद्योग जगत ने बजट में क्या पसंद किया?
उद्योग जगत ने सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार और कृषि के लिए मुफ्त तीन-चरण बिजली (three-phase electricity) के प्रावधान की सराहना की है।