डिंडिगुल में भारत-इजरायल कृषि परियोजना के तहत सब्जी नर्सरी प्रबंधन पर एक विशेष तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय और पैदावार बढ़ाना है।

मुख्य बातें

  • डिंडिगुल में भारत-इजरायल कृषि परियोजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • आधुनिक नर्सरी प्रबंधन और सटीक खेती (Precision Farming) पर जोर।
  • इजरायल की उन्नत तकनीकों का भारतीय किसानों को लाभ।
  • उच्च गुणवत्ता वाले बीज और रोपण सामग्री का उत्पादन।

तमिलनाडु के डिंडिगुल में 'सब्जी नर्सरी प्रबंधन के सिद्धांतों' पर एक महत्वपूर्ण तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत-इजरायल कृषि परियोजना के तहत संचालित है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के बागवानी विभाग और इजरायल दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।

इजरायल दूतावास के कृषि अटैची, उरी रुबिनस्टीन ने बताया कि रेड्डीयारचटम स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना 2013 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य इजरायली तकनीकों के माध्यम से बागवानी में नवाचार लाना और क्षेत्र के हजारों किसानों को प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान करना है। आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान न केवल अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं, बल्कि नए आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पारंपरिक खेती से हटकर सटीक कृषि (Precision Farming) की ओर बढ़ना भारतीय कृषि के भविष्य के लिए अनिवार्य है। डिंडिगुल कलेक्टर दुर्गामूर्ति ने इस पहल की सराहना करते हुए संरक्षित खेती (Protected Cultivation), गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और सटीक सिंचाई के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और रोपण सामग्री प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त करने में भी मदद कर रहा है।

इजरायली विशेषज्ञ डैनियल हदाद के अनुसार, सटीक खेती, फर्टिगेशन और स्वचालित सूक्ष्म-सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेतों में प्रदर्शन प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों जैसे तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल, हरियाणा, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विशेषज्ञ और तमिलनाडु के बागवानी विभाग के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वर्ष 2013 में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने तब से भारत और इजरायल के बीच कृषि सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बनकर काम किया है। यह केंद्र न केवल नई तकनीक सिखाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने के लिए निर्यात-गुणवत्ता वाली सब्जियों के उत्पादन में भी मदद करता है।

क्या आप जानते हैं?: इजरायल अपनी मरुस्थलीय भूमि पर भी उन्नत सिंचाई तकनीकों के कारण दुनिया के सबसे कुशल कृषि देशों में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, सटीक सिंचाई और उच्च गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री के उपयोग के बारे में शिक्षित करना है।

2. क्या किसान इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं?
हाँ, डिंडिगुल कलेक्टर के अनुसार, किसान अपना स्वयं का रोपण सामग्री तैयार करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।