विशेष जांच टीम (SIT) ने आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) की ग्रुप-I भर्ती में एक व्यवस्थित घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें जाली हस्ताक्षरों और अयोग्य कर्मचारियों द्वारा मूल्यांकन का मामला सामने आया है।

  • चयनित 165 उम्मीदवारों में से 160 की OMR शीट में कथित तौर पर बदलाव किए गए।
  • सुरक्षा गार्डों और इलेक्ट्रीशियनों सहित अयोग्य कर्मियों ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया।
  • उम्मीदवारों के बारकोड का उपयोग करके 48,000 से अधिक डुप्लिकेट OMR शीट छापी गईं।

आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) की 2018 की ग्रुप-I भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार, जालसाजी और प्रशासनिक विफलता का एक गहरा जाल उजागर हुआ है। जांच से पता चलता है कि राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक की पवित्रता को वित्तीय लाभ के लिए पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस भर्ती प्रक्रिया के लिए 31 दिसंबर, 2018 को अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके लिए 1.14 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। हालांकि 9,679 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए योग्य पाए गए और अंततः 165 का चयन किया गया, लेकिन SIT ने पाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह से फर्जी थी। APPSC द्वारा पहचाने गए 452 योग्य विषय विशेषज्ञों के बजाय, मूल्यांकन का काम तत्कालीन सचिव पी.एस.आर. अंजनेयुलु से जुड़े दो निजी फर्मों को सौंपा गया था।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अयोग्य व्यक्तियों द्वारा किया गया। इस समूह में 25 स्कूल शिक्षक, निजी व्याख्याता, 66 डेटा एंट्री ऑपरेटर, क्लर्क, सुरक्षा गार्ड और यहां तक कि इलेक्ट्रीशियन भी शामिल थे। इन लोगों ने कथित तौर पर एक रिसॉर्ट में 84 दिनों तक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया, जो APPSC के नियमों का सीधा उल्लंघन है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घोटाला केवल व्यक्तिगत नकल का मामला नहीं है, बल्कि संस्थागत अखंडता की विफलता है। जब सुरक्षा गार्डों को उच्च-स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं का मूल्यांकन सौंपा जाता है, तो पूरी राज्य सिविल सेवा की योग्यता पर सवाल उठता है, जिससे अक्षम लोग शासन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठ सकते हैं।

"OMR शीट में व्यवस्थित हेरफेर और गैर-विशेषज्ञों को मूल्यांकन सौंपना यह दर्शाता है कि सार्वजनिक पदों को बेचने की एक सोची-समझी साजिश रची गई थी।"

फोरेंसिक साक्ष्यों ने सबसे पुख्ता सबूत प्रदान किए हैं। SIT ने नई दिल्ली, हैदराबाद और कोलकाता सहित भारत की विभिन्न केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में 736 उम्मीदवारों के परीक्षा पत्र भेजे थे। परिणाम भयावह थे: 718 OMR शीट में स्पष्ट रूप से बदलाव पाए गए। इसके अलावा, 89 उम्मीदवारों के दस्तावेजों में जाली हस्ताक्षर मिले हैं।

धोखाधड़ी छपाई प्रक्रिया तक फैली हुई थी, जहां उम्मीदवारों के बारकोड नंबरों का उपयोग करके 48,442 डुप्लिकेट OMR शीट बनाई गईं। SIT ने यह भी पाया कि परीक्षकों और जांच अधिकारियों के हस्ताक्षर जाली थे ताकि हेरफेर को छुपाया जा सके। अयोग्य मूल्यांकनकर्ताओं के बावजूद, शामिल दो निजी फर्मों को कुल ₹2.52 करोड़ का भुगतान किया गया।

मापदंड आधिकारिक आवश्यकता SIT के निष्कर्ष
मूल्यांकनकर्ता 452 विषय विशेषज्ञ सुरक्षा गार्ड, इलेक्ट्रीशियन, क्लर्क
मूल्यांकन स्थल सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम निजी रिसॉर्ट (84 दिन)
चयनित उम्मीदवार कुल 165 160 OMR शीट में बदलाव
क्या आप जानते हैं?: OMR शीट के फोरेंसिक विश्लेषण में अक्सर इन्फ्रारेड इमेजिंग का उपयोग किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रारंभिक जमा करने के बाद अंकों को बदलने के लिए अलग स्याही का उपयोग किया गया था या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: निजी फर्मों से कौन सा मुख्य अधिकारी जुड़ा था?
SIT रिपोर्ट में उल्लेख है कि निजी फर्में तत्कालीन APPSC सचिव पी.एस.आर. अंजनेयुलु के परिचित थे।

प्रश्न 2: कितनी डुप्लिकेट OMR शीट खोजी गईं?
कथित तौर पर उम्मीदवारों के बारकोड नंबरों का उपयोग करके लगभग 48,442 डुप्लिकेट OMR शीट छापी गई थीं।