भारत ने 2022 में लगाए गए गेंहू निर्यात प्रतिबंध को हटा दिया है। यह कदम घरेलू कीमतों में गिरावट के बीच किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

  • निर्यात प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटाया गया।
  • घरेलू कीमतों को ऊँचा कर किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य।
  • भारत के पास पर्याप्त गेंहू भंडार और रिकॉर्ड उत्पादन है।

पृष्ठभूमि

मई 2022 में, भारत ने घरेलू कीमतों में तेज़ी को रोकने के लिए गेंहू निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब से निर्यात लाइसेंस के माध्यम से सीमित मात्रा में निर्यात ही संभव था, कुल 50 लाख टन गेंहू और 10 लाख टन गेंहू‑उत्पादों की अनुमति दी गई थी।

वर्तमान स्थिति

24 अगस्त 2026 को, विदेश व्यापार निदेशालय ने घोषणा की कि गेंहू और गेंहू‑उत्पादों का निर्यात "निषेध से मुक्त" कर दिया गया है, जिससे निर्यातकों को तुरंत व्यापार शुरू करने की अनुमति मिल गई। इस निर्णय के साथ साथ, मैदा, सूजी और पूरे आटे पर भी प्रतिबंध हटा दिया गया।

फूड सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि "निर्यात प्रतिबंध को किसानों के हित में हटाया गया है। वर्तमान में घरेलू गेंहू की कीमतें गिरावट पर हैं; निर्यात खोलने से बाजार में कीमतें उठेंगी और रबी सीजन की बुआई को प्रोत्साहन मिलेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि देश में पर्याप्त गेंहू भंडार मौजूद है, जिससे उपभोक्ता कीमतों पर असर नहीं पड़ेगा।

भारत ने 2025‑26 फसल वर्ष में 120.65 मिलियन टन गेंहू का रिकॉर्ड उत्पादन किया, जबकि पिछले वर्ष 117.94 मिलियन टन था। खाद्य निगम (FCI) के पास लगभग 49 मिलियन टन गेंहू का बफ़र स्टॉक मौजूद है।

केंद्रीय मूल्य नियामक के आंकड़े के अनुसार, 24 अगस्त को गेंहू की औसत खुदरा कीमत ₹31.46/kg और गेंहू‑आटे की कीमत ₹37.30/kg रही, जो पिछले साल के समान स्तर पर बनी रही।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that lifting the ban could stabilize domestic wheat prices ahead of the rabi sowing season, improve farmer cash‑flows, and position India as a more reliable exporter in the global grain market.

वित्तीय विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह के अनुसार, निर्यात खोलने से मौसमी कीमतों में स्थिरता आएगी।
Did You Know?: भारत ने 2025‑26 में रिकॉर्ड 120.65 मिलियन टन गेंहू का उत्पादन किया, जो वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा उत्पादन है।

Frequently Asked Questions

क्या निर्यात प्रतिबंध हटने से रिटेल कीमतें बढ़ेंगी? विशेषज्ञ मानते हैं कि निर्यात बढ़ने से घरेलू बाजार में आपूर्ति घटेगी, जिससे कीमतें धीरे‑धीरे ऊपर जा सकती हैं, पर पर्याप्त भंडार इसे नियंत्रित करेगा।

क्या छोटे किसान निर्यात से लाभान्वित होंगे? छोटे किसान सीधे निर्यात नहीं कर पाएंगे, पर वे उच्च फसल मूल्य और बेहतर सत्रा (सिंचाई) समर्थन के माध्यम से अप्रत्यक्ष लाभ उठाएंगे।