नोएडा के कॉल सेंटर से छह लोगों को एयरलाइंस की झूठी नौकरी की पेशकश करके दिल्ली‑पंजाब‑हरियाणा‑चंडीगढ़ के उम्मीदवारों से ₹7,000‑₹10,000 लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप और डेटा रजिस्टर भी जब्त किए।

  • नोएडा में कॉल सेंटर चलाकर नकली एयरलाइंस नौकरी का धोखा
  • प्रत्येक शिकार से ₹7,000‑₹10,000 की फिसली फीस ली गई
  • छह आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

धोखे की रूपरेखा

दिल्ली पुलिस ने सेक्टर‑62, नोएडा में स्थित एक छोटे कमर्शियल भवन के कमरों से चल रहे नकली एयरलाइंस नौकरी रैकैट को उजागर किया। तीन महिलाएँ (उम्र 20‑25) खुद को एयरलाइंस के HR अधिकारी बताती थीं और युवा जॉब सिकर्स को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में नौकरी का वादा करके “रजिस्ट्रेशन फीस” वसूलती थीं। वास्तविकता में न तो कोई एयरलाइंस थी, न ही “Future Wings Learning Institute” मौजूद था।

कैसे उजागर हुआ

मंतोला, पहाड़गंज के निवासी विकास कुमार ने 10 जून को इंस्टाग्राम पर “Bretish Airways” की नौकरी विज्ञापन देखी। विवरण भरने के बाद उन्हें “करिश्मा” नाम की महिला ने कॉल किया, पैन, आधार, मार्कशीट और रेज़्यूमे माँगे और “Future Wings Learning Institute” में डिप्लोमा आवश्यक बताया। विकास ने UPI से ₹7,000 ट्रांसफर किए, जिसके बाद उन्हें एक एडमिशन स्लिप और नौकरी का ऑफ़र मिला, परंतु कॉल बंद होने के बाद उन्हें धोखा समझ आया।

पुलिस की कार्रवाई

अतिरिक्त डीसीपी‑II (सेंट्रल) प्रशांत चौधरी के अनुसार, मोबाइल नंबर, UPI लेन‑देन और वेबसाइट रजिस्ट्रेशन की जाँच से आरोपियों का पता चला। 18 अगस्त को नोएडा के गौर सिटी सेंटर मॉल में किराए के ऑफिस में मुख्य अभियोजक संदीप कुमार (23) और सहयोगी अखिल कुमार (27) को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वेबसाइट डेवलपर राकेश कुमार (47) और टेली‑कॉलर श्वेता, सपना, साक्षी को भी धरापड़ किया गया।

जप्त सामग्री

जाँच में दो लैपटॉप, आठ मोबाइल फ़ोन, आठ सिम‑कार्ड और दो रजिस्टर जिनमें नौकरी‑आशावानों का डेटा था, जब्त किए गए। कुल दस पीड़ितों की पहचान हुई है, परंतु पुलिस का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such scams exploit the aspirational job market of North India, eroding trust in legitimate recruitment channels and prompting stricter digital verification norms across the aviation and education sectors.

“नौकरी‑धोखे में तकनीकी डेटा ट्रेसिंग ने इस केस को जल्दी हल किया, जिससे भविष्य में समान घोटालों को रोकने की राह खुली है,” कहा साइबर‑क्राइम विशेषज्ञ अजय सिंह ने।
Did You Know?: भारत में हर साल लगभग 3,000 से अधिक लोग नौकरी‑धोखे का शिकार होते हैं, जिनमें से अधिकांश ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से होते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस घोटाले में कोई वास्तविक एयरलाइंस शामिल थी?
उत्तर: नहीं, सभी प्रस्तुत एयरलाइंस और प्रशिक्षण संस्थान पूरी तरह से बनावटी थे।

प्रश्न 2: पीड़ितों को किस प्रकार की सहायता मिल सकती है?
उत्तर: दिल्ली पुलिस की विंडो में शिकायत दर्ज कर सकते हैं और UPI‑ट्रांसफ़र रिफंड के लिए बैंक से संपर्क कर सकते हैं।