तेलंगाना में किसान यूनियन ने राज्य सरकार पर किरायेदार किसानों को तुरंत मान्यता देने का दबाव बनाया है, क्योंकि एल नीनो से फसलें बिगड़ रही हैं। वे 2011 के लाइसेंस्ड क्रीकुल्टर्स एक्ट के कार्यान्वयन की माँग कर रहे हैं।

  • किरायेदार किसानों को मान्यता न मिलने से न्यूनतम समर्थन मूल्य में कटौती का खतरा।
  • एल नीनो के कारण फसल नुकसान बढ़ा, त्वरित सरकारी कार्रवाई आवश्यक।
  • 2011 लाइसेंस्ड क्रीकुल्टर्स एक्ट का कार्यान्वयन अभी तक नहीं हुआ।

हैदराबाद—तेलंगाना के किसान संघों ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार से किरायेदार किसानों को तुरंत मान्यता देने का आग्रह किया। टेलंगाना काउलु रैटुला गुर्टिम्पु साधना समिति और संयुक्त किसान मोर्चा ने एल नीनो के कारण बढ़ती फसल क्षति को देखते हुए इस कदम की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिनिधियों में पास्या पद्मा, टी. सागर, बी. कोंडाल, वाय. चंद्र रेड्डी, जक्कुला वेंकटैया, भास्कर, विस्सा किरंकुमार, कन्नेगंती रवी, पी. शंकर और रौथु रमेश शामिल थे। उन्होंने बताया कि कई महीनों से किसान 2011 के लाइसेंस्ड क्रीकुल्टर्स एक्ट के तहत किरायेदार किसानों को क्रीकुल्टर कार्ड प्रदान करने की मांग कर रहे हैं, परंतु सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया।

एल नीनो की वजह से वर्षा में कमी और फसल नुकसान की आशंका के कारण किरायेदार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिलना मुश्किल हो रहा है। यदि समय पर मान्यता नहीं मिली, तो किसानों में आर्थिक तनाव और असंतोष बढ़ेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में किरायेदार किसानों की स्थिति दशकों से अस्थिर रही है। 2011 के लाइसेंस्ड क्रीकुल्टर्स एक्ट ने किरायेदार किसानों को कानूनी पहचान देने का प्रावधान किया, लेकिन कई राज्यों में इसका कार्यान्वयन अधूरा रह गया। पिछले सर्वेक्षणों में दिखाया गया है कि केवल 6.7% कपास, 8.5% मक्का‑सोयाबीन और 17% धान के किरायेदार किसान ही अपने नाम पर फसल बेच पाए हैं। यह आंकड़ा प्रणाली की अक्षमता को उजागर करता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that delaying recognition not only jeopardizes farmer incomes but also undermines food security in a region already vulnerable to climate anomalies. Immediate action can stabilize market prices and prevent rural unrest.

"किरायेदार किसानों को मान्यता देना नीतिगत दायित्व है, नहीं तो कृषि उत्पादन में गिरावट अनिवार्य होगी," कृषि अर्थशास्त्री डॉ. अजय सिंह ने कहा।
Did You Know?: भारत में केवल 15% किरायेदार किसान ही सरकारी खरीद प्रणाली में पंजीकृत हैं, जबकि उनका कुल प्रतिशत 30% से अधिक है।

Frequently Asked Questions

किरायेदार किसानों को मान्यता मिलने से उन्हें कौन‑से लाभ मिलेंगे? उन्हें क्रीकुल्टर कार्ड, MSP प्राप्त करने का अधिकार और सरकारी खरीद में भागीदारी मिल सकेगी।

सरकार कब तक इस प्रक्रिया को शुरू कर सकती है? किसान संघ ने कहा है कि इस सीजन के भीतर प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, ताकि फसल कटाई के समय तक लाभ मिल सके।