अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के विधानसभा चुनाव में 191 ऐसे उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों का विवरण पार्टियों ने नहीं दिया। यह गैर‑पालन फॉर्म C7 के तहत अनिवार्य खुलासे को तोड़ता है, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशित है।
- 51 प्रमुख पार्टियों में से 191 उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा नहीं किया गया।
- फॉर्म C7 के तहत केवल 1,214 में से 1,214 उम्मीदवारों के कारण प्रकाशित हुए।
- भाजपा, कांग्रेस और कई क्षेत्रीय पार्टियों ने अनुपालन में गंभीर चूक की।
अस्सोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने 2026 के विधानसभा चुनावों में फॉर्म C7 के डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया। इस फॉर्म में पार्टियों को उन उम्मीदवारों के चयन के कारण बताने होते हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हों। रिपोर्ट में पाया गया कि 3,539 उम्मीदवारों में से केवल 1,214 के लिए कारण प्रकाशित हुए, जबकि 191 उम्मीदवारों के लिए कोई जानकारी नहीं मिली।
भाजपा ने 302 आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों में से 8 के कारण नहीं बताए, जबकि कांग्रेस ने 202 में से 13 को छुपा रखा। इसके विपरीत, तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में 113 और असम में 3 सभी उम्मीदवारों के कारण प्रकाशित कर दिए। तमिलनाडु और पुदुचेरी में वीके ने 103 में से 29 और डीएमके ने 78 में से 22 उम्मीदवारों के विवरण नहीं दिए।
राज्यवार अनुपालन में अंतर स्पष्ट था। पुदुचेरी ने 39 आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों में से केवल 12 के कारण प्रकाशित किए, जबकि तमिलनाडु में 72 उम्मीदवारों ने 15% की अनुपस्थिति दर्ज की। पश्चिम बंगाल में 55 उम्मीदवारों के कारण अनुपलब्ध रहे, और केरल व असम में क्रमशः 27 और 10 उम्मीदवारों का विवरण नहीं मिला।
जहां खुलासे उपलब्ध थे, पार्टियों ने अक्सर समान तर्क प्रस्तुत किए—उम्मीदवार लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता, जमीनी नेता, अनुभवी राजनेता या जनता का भरोसेमंद प्रतिनिधि हैं। यह मानक तर्क कई राज्यों में दोहराया गया, जिससे पारदर्शिता की वास्तविक भावना पर सवाल उठते हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that systematic non‑disclosure erodes voter confidence and contravenes the Supreme Court’s vision of clean politics, potentially influencing election outcomes across five crucial states.
"वोटर का अधिकार है कि वह जान सके कि उसके प्रतिनिधि पर किस प्रकार के आपराधिक आरोप हैं," कहा राजनीतिक विज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉ. अर्चना सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: फॉर्म C7 का अनुपालन न करने पर कौन-सी कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने इस फॉर्म को अनिवार्य बताया है; गैर‑पालन पर चुनाव आयोग द्वारा दंडात्मक कदम, जैसे पंजीकरण रद्दीकरण, लागू हो सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या यह रिपोर्ट भविष्य के चुनावों में सुधार लाएगी?
उत्तर: रिपोर्ट ने पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल दिया है; यदि चुनाव आयोग सख्त निगरानी करे तो पार्टियों को अधिक जवाबदेह बनना पड़ेगा।