झारखंड लोक सेवा आयोग की 2025 की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग पर नोटिस जारी किया। अब हजारों अभ्यर्थी कोर्ट के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
- Supreme Court ने JPSC परीक्षा को लेकर नोटिस जारी किया
- पेटिशन में CBI जांच या पूरी परीक्षा रद्द करने का अनुरोध
- हजारों अभ्यर्थी अगले आदेश की बारीकी से प्रतीक्षा में
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में धांधली के आरोपों के बाद भारत की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की सुनवाई की और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। नोटिस में CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) को जांच करने और परीक्षा को रद्द करने की मांग को प्रमुखता दी गई।
अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका में चार मुख्य मांगें रखी गईं: 19 अप्रैल 2025 को आयोजित परीक्षा को पूर्णतः रद्द कर नई परीक्षा आयोजित करना, CBI द्वारा स्वतंत्र जांच कराना, एक स्वतंत्र जांच समिति बनाना और OMR शीट की पूरी प्रक्रिया का ऑडिट कराना। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची और न्यायाधीश वी. मोहना ने सभी संबंधित पक्षों—CBI, झारखंड सरकार, राज्य पुलिस महानिदेशक सुमित—से उत्तर देने को कहा।
परीक्षा में अनियमितता का आरोप तब से लगा है जब उम्मीदवारों ने ओवर‑एरर‑मार्किंग (OMR) शीट की स्कैनिंग, कोडिंग और परिणाम निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत की। कई उम्मीदवारों ने सामाजिक मीडिया पर बड़े पैमाने पर आंदोलन किया और पुनः परीक्षा की मांग की। अब अदालत के नोटिस के बाद उनका ध्यान अगले सुनवाई पर केंद्रित हो गया है।
ऐसी स्थितियों में भारत के न्यायिक इतिहास में कई समान उदाहरण मिले हैं, जहाँ उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक सेवा परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में CBI को नियुक्त किया है। इससे न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता बल्कि प्रशासनिक संस्थानों की सार्वजनिक भरोसेमंदता भी प्रभावित होती है।
यदि सुप्रीम कोर्ट CBI जांच को मंजूरी देता है, तो यह एक व्यापक जांच होगी जिसमें डिजिटल रिकॉर्ड, OMR शीट की स्कैनिंग प्रक्रिया और परिणाम घोषणा के लॉजिस्टिक्स की जाँच शामिल होगी। दूसरी ओर, यदि अदालत परीक्षा को रद्द करने का आदेश देती है, तो JPSC को नई तिथि निर्धारित कर पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करना पड़ेगा, जिससे लाखों अभ्यर्थियों की करियर योजनाओं पर असर पड़ेगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that इस फैसले का प्रभाव न केवल झारखंड में बल्कि पूरे भारत में सार्वजनिक सेवा परीक्षाओं की पारदर्शिता पर पड़ेगा, जिससे भविष्य में समान शिकायतों को कम करने के लिए कड़े मानक स्थापित हो सकते हैं।
"परीक्षा में भरोसे की कमी सार्वजनिक प्रशासन को कमजोर करती है; इसलिए स्वतंत्र जांच अनिवार्य है," कहा शत्रुजित सिंह, शिक्षा नीति विशेषज्ञ।
Frequently Asked Questions
Q: क्या CBI जांच का आदेश मिलने पर परीक्षा रद्द हो जाएगी?
A: अभी तक कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है; अदालत दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है।
Q: अभ्यर्थियों को आगे क्या करना चाहिए?
A: उन्हें कोर्ट के अगले आदेशों का इंतजार करना चाहिए और अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी रखनी चाहिए।