तेलंगाना शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अकुनुरी मुरली ने प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विद्या बस यात्रा का शुभारंभ किया। यह यात्रा 10 जिलों में 27 सितंबर तक शिक्षा नीति 2026 की मांगों को लेकर जाएगी।
- विद्या बस यात्रा ने तीन मुख्य मांगें रखी: हर मंडल में सार्वजनिक स्कूल, निजी स्कूल शुल्क नियमन, और बजट का 18% शिक्षा को
- यात्रा 20-सीट वाली महिंद्रा SML एसी मिनी‑बस से होगी, जो 27 सितंबर तक 10 जिलों को कवर करेगी
- अकुनुरी मुरली ने कहा, 95% सरकारी स्कूल ‘स्कूल’ नहीं कहे जा सकते, तत्काल सुधार आवश्यक है
यात्रा का प्रारंभ और पृष्ठभूमि
तेलंगाना शिक्षा आयोग (TEC) के पूर्व अध्यक्ष अकुनुरी मुरली ने मंगलवार को तेलंगाना प्रजा फ्रंट के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर विद्या बस यात्रा का शुभारंभ किया। यह पहल TEC द्वारा तैयार किए गए तेलंगाना शिक्षा नीति 2026 के बाद आई है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक शिक्षा को सुदृढ़ करना है।
यात्रा का वाहन और मुख्य मांगें
यात्रा के लिए उपयोग की गई महिंद्रा SML एसी मिनी‑बस में लगभग 20 सीटें हैं और इसमें तीन प्रमुख मांगें बड़े अक्षरों में लिखी हैं: हर मंडल में अरुत्रा मॉडल पर आधारित सार्वजनिक स्कूल, निजी स्कूलों और जूनियर कॉलेजों में शुल्क नियमन, और राज्य के वार्षिक बजट का 18% शिक्षा को आवंटित करना। इन मांगों को समर्थन देने के लिए विशिष्ट विधायी उपायों की भी माँग की गई है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले दो दशकों में कई पहलें देखी गईं, लेकिन अधिकांश समय केवल सतही सुधारों तक सीमित रही हैं। 2014 में स्थापित TEC ने 2020 में पहला व्यापक शिक्षा नीति जारी की, परन्तु इसके कार्यान्वयन में कई बाधाएँ आईं। 2026 की नई नीति में अधिक ठोस लक्ष्य और निगरानी तंत्र शामिल किए गए थे, परन्तु अभी भी जमीन स्तर पर कई स्कूल ‘अयोग्य’ माने जाते हैं।
यात्रा का मार्ग और कार्यक्रम
यात्रा मंगलवार को बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा (एन.टी.आर. मार्ग) से शुरू हुई और 27 सितंबर तक सभी 10 पूर्वी जिलों को कवर करेगी। टीम सरकारी स्कूलों का दौरा करेगी, स्थानीय समुदाय और अभिभावकों से संवाद करेगी, और सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच में आने वाली चुनौतियों का आकलन करेगी। प्रत्येक जिले में सरकारी तथा निजी स्कूलों के अभिभावकों के साथ सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे।
सहयोगी दल और प्रमुख हस्तियाँ
इस यात्रा में ओस्मानिया विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त पत्रकारिता प्रोफ़ेसर पद्मजा शॉ, सेवानिवृत्त प्रबंधक एवं कार्यकर्ता एम.वी. रेड्डी, एम. चम्पलाल, तथा कई युवा कार्यकर्ता जैसे एन. रुबिना, टी. निर्मला, सृजना यादव, मुप्पुरी कुमारन्ना, निखिल विजया कृष्ण और पलकुरी अशोक कुमार शामिल हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that if the three‑point demand is met, Telangana could see a 12% rise in literacy rates within five years, positioning the state ahead of many southern counterparts and setting a benchmark for India’s education reforms.
"शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मजबूत किए बिना कोई भी विकास योजना टिकाऊ नहीं हो सकती," कहा शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र कुमार।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यात्रा के दौरान किसी भी सरकारी स्कूल को बंद किया जाएगा?
उत्तर: नहीं, यात्रा का उद्देश्य सुधार के लिए दबाव बनाना है, न कि स्कूल बंद करना।
प्रश्न 2: निजी स्कूलों के शुल्क नियमन के लिए कौन‑सी विधायी प्रक्रिया प्रस्तावित है?
उत्तर: कार्यकर्ता एक विशिष्ट ‘शिक्षा शुल्क नियमन अधिनियम’ की माँग कर रहे हैं, जिसे राज्य विधान सभा में पेश किया जाएगा।