2025 में भारत ने 31,000 नए डॉलर मिलियनियर जोड़े, जिससे चीन से काफी आगे रहा। भारतीय अमीर लोग अपनी संपत्ति का मुख्य भाग रियल एस्टेट और सोने में रखते हैं, जो पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं से अलग है। यह संपत्ति का भौतिक स्वरूप अभी भी प्रमुख है, जबकि वैश्विक स्तर पर वित्तीयकरण बढ़ रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 2025 में भारत ने 31,000 नए डॉलर मिलियनियर जोड़े, चीन से आगे
- भारतीय धनी का अधिकांश धन रियल एस्टेट और सोने में निहित
- धन का संकेंद्रण मुख्यतः मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में
वित्तीय वर्ष 2025 में भारत ने 31,000 से अधिक नए डॉलर मिलियनियर बनाए, जिससे चीन की तुलना में वृद्धि की दर स्पष्ट रूप से बेहतर रही। यह आंकड़ा न केवल भारत की तेज़ी से बढ़ती मध्यम वर्ग को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक धन निर्माण में देश की नई भूमिका को भी उजागर करता है।
भौतिक संपत्ति की प्राथमिकता
पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में शेयर, बॉन्ड और फंड जैसे वित्तीय साधनों में धन का अधिक हिस्सा निवेश किया जाता है, जबकि भारत में अमीर वर्ग का अधिकांश धन रियल एस्टेट, सोना और अन्य ठोस संपत्तियों में संलग्न है। इस प्रवृत्ति का मूल कारण ऐतिहासिक विश्वास, नियामक वातावरण और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य है, जहाँ जमीन और सोना स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
शहरी केंद्रों में धन का संकेंद्रण
धन का यह अभिसरण मुख्यतः मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में देखा जाता है। इन शहरी क्षेत्रों में रियल एस्टेट की कीमतें लगातार बढ़ती रही हैं, जिससे निवेशकों को उच्च रिटर्न की आशा रहती है। हालांकि, यह असमानता ग्रामीण एवं छोटे शहरों में विकास को बाधित करती है, जिससे आर्थिक असमानता की नई चुनौती उत्पन्न होती है।
चीन से तुलना और भविष्य की दिशा
चीन में समान अवधि में धन सृजन की गति धीमी रही, क्योंकि उसकी नीति वित्तीय बाजारों के आधुनिकीकरण और संपत्ति बबल को नियंत्रित करने पर अधिक केंद्रित रही। भारत की इस गति का मतलब यह नहीं कि वह सिर्फ रियल एस्टेट पर निर्भर रहेगा; धीरे-धीरे वित्तीय बाजारों में निवेश का विस्तार हो रहा है, विशेषकर प्रौद्योगिकी‑आधारित स्टार्ट‑अप और म्यूचुअल फंड्स में।
नीति निर्माताओं के लिए संकेत
सरकार को इस रुझान को समझते हुए संपत्ति नियमन, कर नीति और वित्तीय साक्षरता को सुदृढ़ करना आवश्यक है। यदि ठोस संपत्तियों पर अत्यधिक निर्भरता जारी रही, तो संभावित बबल और आर्थिक अस्थिरता का जोखिम बढ़ सकता है। इस बीच, वित्तीय उपकरणों के विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, निवेशकों को सुरक्षित और पारदर्शी विकल्प प्रदान करेगा।