केंद्रीय कैबिनेट ने वाराणसी में वरुणा व गंगा नदियों के साथ दो ऊँचे हाईवे कॉरिडोर को 25,446 करोड़ रुपये की लागत से शुरू करने की स्वीकृति दी। यह कदम शहर में बढ़ती ट्रैफ़िक जाम को कम करने और 15 करोड़ यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए उठाया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • वाराणसी में दो ऊँचे हाईवे कॉरिडोर की मंजूरी
  • परियोजना लागत: ₹25,446 करोड़
  • डिज़ाइन गति 80‑100 किमी/घंटा, यात्रा समय में 40 मिनट से 20 मिनट तक कमी

वाराणसी, जो हर साल लगभग 15 करोड़ धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रियों को आकर्षित करता है, अपनी मौजूदा सड़क नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव महसूस कर रहा था। इस बढ़ती भीड़‑भाड़ को घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक व्यापक वाराणसी डी‑कंजेशन योजना के हिस्से के रूप में दो बड़े‑पैमाने के ऊँचे हाईवे कॉरिडर को मंजूरी दी।

परियोजनाओं का विवरण

पहला कॉरिडर 43 किमी लंबा है, जो NH‑31 को वाराणसी रिंग रोड (NH‑135B) से जोड़ता है और वरुणा नदी के किनारे स्थित है। यह 6/4‑लेन का ऊँचा मार्ग 80‑100 किमी/घंटा की डिजाइन गति के साथ निर्मित होगा, जिसमें फ्लायओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड शामिल हैं। इस मार्ग से NH‑31 से काशी रेलवे स्टेशन तक की यात्रा का समय 40 मिनट से घटकर 20 मिनट रहेगा।

दूसरा कॉरिडर 46 किमी का है, जो NH‑19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ता है और गंगा नदी के साथ विस्तृत होगा। इस प्रोजेक्ट में 6‑लेन का ऊँचा मुख्य मार्ग, 910 मी की केबल‑स्टेड पुल, 1.32 किमी का एक्स्ट्राडोस्ड फूट‑ओवर‑ब्रिज‑कम्प्लेक्स और रेल‑ओवर‑ब्रिज (मालविया ब्रिज) शामिल हैं। विशेष रूप से, एक ट्रैवलेटर के माध्यम से काशी विश्वनाथ मंदिर तक पैदल यातायात को जोड़ने के लिए फूट‑ओवर‑ब्रिज बनाया जाएगा।

आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव

इन दो कॉरिडरों की कुल लागत ₹25,446 करोड़ है और इन्हें हाइब्रिड एन्नुइटी मोड (HAM) में विकसित किया जाएगा, जिससे निजी निवेशकों को राजस्व‑आधारित रिटर्न मिलेगा। अनुमानित है कि इन मार्गों के पूर्ण होने पर वाराणसी‑चंदौली क्षेत्र में औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट रह जाएगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

संबंधित रेल परियोजनाएँ

कैबिनेट ने ओडिशा में 74 किमी के पैराडिप‑हरिदासपुर लाइन के डबलिंग तथा झारखंड में 71 किमी के राजखरसवान‑डैंगोपोसी लाइन के क्वाड्रुप्लिंग को भी मंजूरी दी। ये रेल परियोजनाएँ पोर्ट‑टू‑इंडस्ट्री कनेक्टिविटी को बढ़ाकर भारत के प्रमुख फ्रेट कैरिज़ को सुदृढ़ करेंगी, जिससे वार्षिक 44 मिलियन टन फ्रेट ट्रैफ़िक में वृद्धि होगी।

भविष्य की दृष्टि

वाराणसी के इन दो ऊँचे कॉरिडरों से न केवल शहर की मौजूदा ट्रैफ़िक समस्याएँ हल होंगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी सुरक्षित, तेज़ और पर्यावरण‑अनुकूल बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भारत के अन्य भीड़‑भरे तीर्थस्थलों में दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर शहरी गतिशीलता में स्थायी सुधार संभव हो सकेगा।