भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूर्व वित्त सचिव और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- राजीव कुमार तीन साल के कार्यकाल के लिए HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं।
- RBI ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत इस नियुक्ति को मंजूरी दी है।
- कुमार 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी और पूर्व वित्त सचिव रह चुके हैं।
- वे अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे, जिन्होंने नैतिकता का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था।
मुंबई: बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। यह नियुक्ति 15 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगी और तीन साल की अवधि के लिए होगी।
एक अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व
66 वर्षीय राजीव कुमार का करियर प्रशासनिक उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है। 1984 बैच के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के रूप में, उन्होंने भारत सरकार के वित्त सचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद, उन्हें 2022 में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। फरवरी 2025 में चुनाव आयोग से सेवानिवृत्त होने के बाद, उनका बैंकिंग क्षेत्र में आगमन बैंक के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैंकिंग विनियमन और उत्तराधिकार
बैंक द्वारा एक नियामक फाइलिंग में बताया गया कि यह नियुक्ति बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 10B(1A)(i) के तहत की गई है। राजीव कुमार, अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे, जिन्होंने 18 मार्च को अचानक इस्तीफा दे दिया था। चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में संकेत दिया था कि बैंक के भीतर कुछ प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं, जो कि बैंक के लिए एक संवेदनशील विषय रहा है।
बोर्ड में स्थिरता और भविष्य की दिशा
इस नेतृत्व परिवर्तन के बीच, केकी मिस्त्री, जो वर्तमान में अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में कार्य कर रहे हैं, बैंक के बोर्ड में एक गैर-कार्यकारी गैर-स्वतंत्र निदेशक के रूप में अपनी सेवा जारी रखेंगे। राजीव कुमार की नियुक्ति से HDFC बैंक को एक ऐसा नेतृत्व मिलने की उम्मीद है जो नीतिगत मामलों और नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) में गहरा अनुभव रखता हो, जो निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंकों में से एक के लिए अत्यंत आवश्यक है।