अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने तीन भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों को नई टास्क‑फ़ोर्स में शामिल किया, जिससे दिखा कि प्रतिभा राजनीति से ऊपर है। यह कदम भारतीय‑अमेरिकी पेशेवरों की बढ़ती भूमिका और आव्रजन‑विरोधी माहौल में एक स्पष्ट संदेश देता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- फेड ने तीन भारतीय मूल के विशेषज्ञों को प्रमुख पैनलों में नियुक्त किया
- राघुराम राजन, राज चेत्ती और आशा शर्मा आर्थिक नीति में विविधता लाएंगे
- यह नियुक्ति अमेरिकी राजनीति में आव्रजन विरोध के बीच प्रतिभा को प्राथमिकता देती है
वॉशिंगटन – अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने अपने पाँच प्रमुख टास्क‑फ़ोर्स के नेतृत्व में बदलाव किए, जिनमें तीन भारतीय‑अमेरिकियों को शीर्ष पदों पर रखा गया। फेड चेयरमैन केविन वार्श ने कहा कि यह “परिवर्तनकारी बदलाव” फेड को तेज़ी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करेंगे।
नियुक्तियों का विवरण
पहले फ़ॉर्मेट में, पूर्व RBI गवर्नर राघुराम राजन को बैलेंस‑शीट नीति टास्क‑फ़ोर्स का सह‑अध्यक्ष बनाया गया। राजन, जो अब यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो बूट स्कूल में वित्त के प्रमुख प्रोफेसर हैं, 2008 के वित्तीय संकट से पहले ही बैंकों की जोखिम‑प्रवणता पर चेतावनी दे चुके थे। दूसरी ओर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राज चेत्ती को लिक्विडिटी डिपेंडेंस टास्क‑फ़ोर्स में शामिल किया गया, जहाँ वे जेरमी स्टीन, डग मैकमिलन और केविन मर्फी के साथ काम करेंगे। चेत्ती की सामाजिक गतिशीलता और असमानता पर शोध ने सार्वजनिक नीति को नई दिशा दी है।
सिलिकॉन वैली का दृष्टिकोण
तीसरे सदस्य आशा शर्मा हैं, जो माइक्रोसॉफ्ट के Xbox डिवीजन की सीईओ हैं। वह उत्पादकता और रोजगार टास्क‑फ़ोर्स की अध्यक्षता करेंगे, जहाँ मार्क एंड्रिसन और स्टैनफ़ोर्ड के अर्थशास्त्री चाड जॉन्स के साथ सहयोग होगा। उनका तकनीकी पृष्ठभूमि फेड को एआई‑आधारित उत्पादकता चुनौतियों को समझने में मदद करेगा, खासकर जब कंपनियों में बड़े स्तर पर छंटनी जारी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और सामाजिक प्रभाव
इन नियुक्तियों का महत्व केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। भारतीय‑अमेरिकी लोग जनसंख्या के 1 % से थोड़ा अधिक होते हुए भी फाइनेंस, टेक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक क्षेत्रों में निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। यह प्रवृत्ति दशकों के उच्च शिक्षा और H‑1B वीज़ा प्रणाली के परिणामस्वरूप बनी है, जबकि वर्तमान में एंटी‑इमिग्रेशन रेटोरिक तेज़ी से बढ़ रहा है।
फेड का यह कदम इस बात को उजागर करता है कि जब तक प्रतिभा आर्थिक स्थिरता, कम महंगाई और वित्तीय संकटों की रोकथाम में सक्षम है, तब तक राष्ट्रीय पहचान को प्राथमिकता देना व्यर्थ है। यह संदेश उन आलोचकों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो आव्रजन को सुरक्षा के ख़तरे के रूप में देखते हैं।