केन्द्र सरकार ने पेट्रोल पर ₹3.5 और डीजल पर ₹24 प्रति लीटर अतिरिक्त टैक्स लगा दिया, साथ ही एटीएफ निर्यात पर भी कर बढ़ा। राजस्व बढ़ाने के इरादे से लिया गया यह कदम, उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में अतिरिक्त बोझ का कारण बन सकता है।
मुख्य बिंदु
- पेट्रोल पर अतिरिक्त टैक्स ₹3.5/लीटर
- डीजल पर अतिरिक्त टैक्स ₹24/लीटर
- एटीएफ निर्यात पर नई विंडफॉल टैक्स लागू
नई कर दरों की घोषणा
वित्त मंत्रालय ने आज आधिकारिक रूप से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ निर्यात पर नई कर दरें घोषित कीं। पेट्रोल पर अतिरिक्त ₹3.5 प्रति लीटर और डीजल पर ₹24 प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया, जिससे बाजार में कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी की संभावना है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले पाँच वर्षों में सरकार ने दो बार समान स्तर पर ईंधन कर में वृद्धि की थी, 2019 में पेट्रोल पर ₹2 और डीजल पर ₹15 की बढ़ोतरी हुई थी। उन बढ़ोतरीयों ने भी उपभोक्ता कीमतों को बढ़ाते हुए महंगाई में योगदान दिया था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the added burden will disproportionately affect lower‑ and middle‑income households, potentially slowing down consumer spending in the retail sector.
"ईंधन पर टैक्स बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत में इजाफा होगा, जिससे वस्तु कीमतों पर भी दबाव पड़ेगा," कहा अर्थशास्त्री डॉ. अजय सिंह।
Did You Know?
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: नई टैक्स दरें कब से लागू होंगी?
उत्तर: ये दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी जाएँगी।
प्रश्न 2: क्या इस टैक्स वृद्धि से एटीएफ निर्यात में कमी आएगी?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत के कारण निर्यात मात्रा घट सकती है।