ज्वेलरी की प्रधानता धीरे‑धीरे घट रही है, जबकि वित्तीय सोना शहरी और युवा निवेशकों में लोकप्रिय हो रहा है। अब 70% कुल सोने की माँग बार, कॉइन और ETF जैसे निवेश साधनों से आती है।

मुख्य बिंदु

  • भारत की कुल सोने की माँग में 70% अब निवेश‑उपकरणों से आती है।
  • ज्वेलरी की माँग में 17% की गिरावट, जबकि ETF रिकॉर्ड हासिल कर रहे हैं।
  • RBI की बढ़ती सोने की खरीद ने विदेशी मुद्रा में स्थिरता लाई।

विश्व सोने की परिषद (WGC) के आंकड़ों के अनुसार, पहले छमाही में भारत ने 282 टन सोना खरीदा, जिसमें निवेश मांग प्रमुख रही। ETFs ने 20 टन की नई ऊँचाई छू ली, जबकि ज्वेलरी की माँग 141.2 टन पर गिर गई, जो 2000 के बाद की दूसरी सबसे कम स्तर है।

ऐतिहासिक रूप से सोने को भारत में सामाजिक समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता रहा है। लेकिन पिछले दशकों में उच्च कीमतों और आयात शुल्क के कारण, पारंपरिक ज्वेलरी खरीद कमज़ोर हो गई, और निवेशक बार, कॉइन और ETF को प्राथमिकता देने लगे।

Historical Background

भारत ने 19वीं सदी से सोने को धन के सबसे भरोसेमंद रूप में माना है। 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद, घरेलू निवेशकों ने धीरे‑धीरे सोने को वित्तीय संपत्ति के रूप में देखना शुरू किया। 2015 में शुरू हुए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम ने निजी सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाने की कोशिश की, लेकिन कर‑सम्बंधी जटिलताओं के कारण यह अपेक्षित सफलता नहीं दे पाया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the shift toward financial gold strengthens India’s external balance, cushions rupee depreciation, and creates new avenues for portfolio diversification among millennials.

“वित्तीय सोना अब भारत की पूंजी संरचना में एक प्रमुख घटक बन रहा है, जिससे जोखिम प्रबंधन आसान हो रहा है।” – RBI मुख्य अर्थशास्त्री
Did You Know?: भारत में निजी घरों में संग्रहीत सोने की मात्रा 25,000 टन से अधिक है, जो विश्व में शीर्ष पाँच में शामिल है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सोने के ETFs पारंपरिक ज्वेलरी निवेश से बेहतर रिटर्न देते हैं?

उत्तर: आमतौर पर ETFs कम चार्ज और उच्च लिक्विडिटी के कारण बेहतर रिटर्न प्रदान करते हैं, लेकिन बाजार की अस्थिरता जोखिम को भी बढ़ा सकती है।

प्रश्न 2: RBI की सोने की खरीद नीति का घरेलू निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: RBI की बड़ी खरीद से बाजार में आपूर्ति बढ़ती है, जिससे कीमतों में स्थिरता आती है और छोटे निवेशकों को प्रवेश की सुविधा मिलती है।