आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने घोषणा की है कि सरकार मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की समीक्षा कर रही है, जिसका उद्देश्य न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करना है, बल्कि भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश (ODI) की रक्षा करना भी है।
मुख्य बातें
- मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) का नया ड्राफ्ट जल्द कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
- सरकार का ध्यान अब भारतीय कंपनियों द्वारा किए जाने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ODI) की सुरक्षा पर भी है।
- अनुराधा ठाकुर ने जांच एजेंसियों के डर से निवेश कम होने के दावों को खारिज किया।
- भारत में सकल FDI प्रवाह बढ़कर 95 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया पॉलिसी फोरम' के दौरान, आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकार मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की समीक्षा कर रही है और इसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस बार का दृष्टिकोण केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक नया आयाम जोड़ा गया है: भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश (ODI) की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
ठाकुर ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर विस्तार कर रही हैं, उनके हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "हमारे अपने निवेशकों और कंपनियों को भी सुरक्षा की आवश्यकता होगी, इसलिए हम अपनी वार्ताओं में इस नए आयाम को ध्यान में रख रहे हैं।"
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के निवेश परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए भारी विदेशी निवेश और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी वापस ले जाने (repatriation) के कारण भारत का शुद्ध FDI प्रवाह प्रभावित हुआ है। 2020-21 में जो शुद्ध FDI लगभग $44 बिलियन था, वह 2024-25 में घटकर $1 बिलियन से भी कम रह गया था। नई BIT नीति इस असंतुलन को ठीक करने और भारतीय वैश्विक विस्तार को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने में मदद कर सकती है।
"भारतीय निजी क्षेत्र की परिपक्वता इस बात से झलकती है कि हमारी कंपनियां अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर निवेश कर रही हैं।"
इसके अतिरिक्त, सचिव ने उन चिंताओं को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी जांच एजेंसियों के डर से विदेशी निवेशक भारत आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसियां अब अधिक प्रक्रिया-संचालित और पारदर्शी तरीके से काम कर रही हैं, और सरकार का लक्ष्य केवल गंभीर अपराधों पर ध्यान केंद्रित करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
द्विपक्षीय निवेश संधियाँ (BITs) दो देशों के बीच निवेशकों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। 2015 के मॉडल BIT ने 'स्थानीय उपचार' (local remedies) का नियम लागू किया था, जिसमें विदेशी निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता से पहले पांच साल तक घरेलू कानूनी रास्तों का उपयोग करना अनिवार्य था। आलोचकों ने इसे निवेश में बाधा माना है, लेकिन सरकार अब इस ढांचे को और अधिक संतुलित बनाने पर विचार कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मॉडल BIT क्या है?
यह एक मानक ढांचा है जिसका उपयोग भारत अन्य देशों के साथ निवेश सुरक्षा समझौते करने के लिए करता है।
2. भारतीय कंपनियों के लिए इसमें क्या नया है?
नई नीति में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए जाने वाले निवेश (ODI) को भी कानूनी सुरक्षा प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है।