प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए शिकायत दर्ज की है। इसमें करोड़ों रुपये के फंड के हेरफेर और शेल कंपनियों के इस्तेमाल का आरोप है।

मुख्य बिंदु

  • ED ने RInfra और RCom के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत दर्ज की है।
  • NHAI परियोजनाओं से ₹187 करोड़ के गबन का आरोप।
  • RCom मामले में ₹40,185 करोड़ के बकाया राशि को अपराध की कमाई बताया गया है।
  • शेल कंपनियों और फर्जी इनवॉइस के जरिए फंड डायवर्जन का मामला।

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनियों, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (RInfra) और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी ने न केवल एक नई अभियोजन शिकायत दर्ज की है, बल्कि फंड के कथित डायवर्जन से संबंधित एक पूरक शिकायत भी पेश की है।

NHAI परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर हेरफेर

ED की जांच के अनुसार, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने चार महत्वपूर्ण NHAI टोल-रोड परियोजनाओं (त्रिची-करूर, त्रिची-डिंगिडुल, सलेम-उलुनदुरपेट और जयपुर-रींगस) के लिए आवंटित सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया। जांच में पाया गया कि सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी उप-अनुबंध (subcontracting) कार्यों के माध्यम से लगभग ₹187 करोड़ की राशि का गबन किया गया था। इस घोटाले को अंजाम देने के लिए फर्जी इनवॉइस और ओवरवैल्यूड डायमंड आयात जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया था।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जब बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटित धन को निजी लाभ या समूह की अन्य कंपनियों के ऋण चुकाने के लिए मोड़ा जाता है, तो यह न केवल बैंकिंग प्रणाली बल्कि देश की आर्थिक प्रगति को भी चोट पहुंचाता है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस की विफलता और शेल कंपनियों का नेटवर्क वित्तीय धोखाधड़ी के सबसे जटिल स्वरूपों में से एक है।

RCom और फंड डायवर्जन का जाल

RCom मामले में, ED ने कंपनी के साथ-साथ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि बैंकों से लिए गए ऋण का उपयोग ऋण को 'एवरग्रीन' करने (पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेना) के लिए किया गया था, न कि उस उद्देश्य के लिए जिसके लिए वे स्वीकृत किए गए थे।

विवरणRInfra मामलाRCom मामला
मुख्य आरोपNHAI प्रोजेक्ट फंड का गबनऋण का दुरुपयोग और फंड डायवर्जन
अनुमानित राशि₹187 करोड़ (प्रारंभिक)₹40,185.55 करोड़ (बकाया)
तरीकाफर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंगलेयरिंग और शेल कंपनियां

जांच में यह भी सामने आया है कि इन निधियों का उपयोग प्रमोटरों द्वारा भारत के बाहर व्यक्तिगत संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रिलायंस समूह के विभिन्न उपक्रमों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच पिछले कई वर्षों से विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है, जो कॉर्पोरेट ऋणों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है।

Did You Know?: मनी लॉन्ड्रिंग में 'लेयरिंग' का अर्थ है धन के स्रोत को छिपाने के लिए उसे कई जटिल बैंक खातों और संस्थाओं के माध्यम से घुमाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. ED ने किन कंपनियों पर कार्रवाई की है?
ED ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (RInfra) और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ कार्रवाई की है।

2. RCom मामले में कुल कितनी राशि विवादित है?
RCom मामले में अपराध की कमाई (proceeds of crime) ₹40,185.55 करोड़ आंकी गई है।