विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) ने भारत सरकार से सोने को 'रणनीतिक खनिज' घोषित करने का आग्रह किया है, जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है। इस कदम से खनन प्रक्रिया आसान होगी लेकिन आम आदमी के लिए सोना और महंगा हो सकता है।

मुख्य बातें

  • विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) ने सोने को 'रणनीतिक खनिज' (Strategic Mineral) घोषित करने का प्रस्ताव दिया है।
  • इस दर्जे से भारत में सोने के खनन के लिए सरकारी अनुमति प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
  • सोने की बढ़ती कीमतें और डॉलर की गिरती वैल्यू वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर रही है।
  • WGC का सुझाव है कि घरेलू सोने के उपयोग से आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है।

भारत में सोने की कीमतों को लेकर आम जनता में चिंता बनी हुई है। जहाँ एक ओर लोग कीमतों में गिरावट का इंतज़ार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council - WGC) ने केंद्र सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। WGC ने मांग की है कि भारत में सोने को केवल एक धातु नहीं, बल्कि एक 'रणनीतिक खनिज' (Strategic Mineral) के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए।

'स्वर्णम उड़ान 2047': एक नया रोडमैप

WGC ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट 'स्वर्णम उड़ान 2047' जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यदि सरकार सोने को रणनीतिक खनिज का दर्जा देती है, तो देश में सोने के खनन को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में, भारत में खनन करना अत्यंत कठिन और खर्चीला है, क्योंकि प्रति टन उत्पादन बहुत कम है। हालांकि, रणनीतिक दर्जा मिलने से खनन कंपनियों के लिए सरकारी अनुमतियाँ प्राप्त करना आसान हो जाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान में खनन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से कई तरह की पर्यावरणीय और वन संबंधी अनुमतियाँ लेनी पड़ती हैं, जो एक जटिल प्रक्रिया है। WGC इंडिया के क्षेत्रीय सीईओ सचिन जैन के अनुसार, रणनीतिक दर्जा मिलने से 'सिंगल विंडो सिस्टम' के माध्यम से लाइसेंस प्राप्त करना आसान होगा, जिससे कंपनियों को विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

सोने को रणनीतिक दर्जा देने से खनन की बाधाएं दूर होंगी, लेकिन इससे बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) है। सोने के भारी आयात के कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है। WGC का तर्क है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम होगी।

डॉलर की स्थिति और वैश्विक प्रभाव

वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी डॉलर के मूल्य में गिरावट (लगभग 1.05%) सोने की कीमतों को ऊपर धकेल रही है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में युद्ध जैसी भू-राजनीतिक अस्थिरता भी सोने की मांग को बढ़ा रही है।

क्या आप जानते हैं?: यदि भारत में घरों में रखे सोने का केवल 1% हिस्सा भी अर्थव्यवस्था में लाया जाए, तो लगभग ₹3.1 लाख करोड़ के सोने के आयात को रोका जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या सोने को रणनीतिक खनिज घोषित करने से कीमतें कम होंगी?
नहीं, बल्कि इससे खनन प्रक्रिया आसान होगी जिससे आपूर्ति बढ़ सकती है, लेकिन वैश्विक कारकों के कारण कीमतें बढ़ भी सकती हैं।

2. डॉलर और सोने के बीच क्या संबंध है?
आमतौर पर, जब डॉलर का मूल्य गिरता है, तो सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं।