टाटा एसेट मैनेजमेंट के मुर्थी नागराजन ने आरबीआई की मौद्रिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केंद्रीय बैंक विकास और मुद्रास्फीति की अनिश्चितता के बीच समय खरीदने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

  • आरबीआई हेडलाइन मुद्रास्फीति के बजाय 'कोर इन्फ्लेशन' पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  • मुर्थी नागराजन के अनुसार, आरबीआई अनिश्चितता के कारण नीतिगत निर्णय लेने में देरी कर रहा है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार और FCNR(B) प्रवाह मजबूत होने से विदेशी मुद्रा की चिंता कम है।
  • यदि मुद्रास्फीति 5% से ऊपर जाती है, तो आरबीआई को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

भारतीय वित्तीय बाजारों में इस समय अनिश्चितता का माहौल है। टाटा एसेट मैनेजमेंट (Tata Asset Management) के फिक्स्ड इनकम हेड, मुर्थी नागराजन ने संकेत दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति ने निवेशकों को भ्रमित कर दिया है। नागराजन का तर्क है कि हालांकि आरबीआई आधिकारिक तौर पर 'हेडलाइन इन्फ्लेशन' (Headline Inflation) की बात कर रहा है, लेकिन उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा स्पष्ट रूप से 'कोर इन्फ्लेशन' (Core Inflation) की ओर इशारा करती है।

अनिश्चितता और 'समय खरीदने' की रणनीति

नागराजन के अनुसार, विकास (Growth) और मुद्रास्फीति (Inflation) के मोर्चे पर स्पष्टता की कमी के कारण आरबीआई वर्तमान में 'समय खरीदने' की कोशिश कर रहा है। आरबीआई का ध्यान अब खाद्य, ईंधन और कीमती धातुओं को छोड़कर कोर इन्फ्लेशन पर केंद्रित हो गया है, जो 2.5% से बढ़कर 4% तक जा सकता है। यदि आरबीआई इस लक्ष्य को अपनाता है, तो 2026-27 में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बहुत कम है।

BozokMedia विश्लेषण: क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि आरबीआई एक बेहद नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ विकास दर मजबूत है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक युद्ध और मानसून की अनिश्चितता मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती है। आरबीआई चाहता है कि जब तक विकास के संकेत और स्पष्ट न हो जाएं, तब तक वह दरों में बदलाव न करे।

आरबीआई हेडलाइन मुद्रास्फीति के बजाय कोर इन्फ्लेशन पर ध्यान केंद्रित करके अनिश्चितता के बीच समय खरीदने की कोशिश कर रहा है।

विदेशी निवेश के मोर्चे पर, नागराजन ने बताया कि FPI प्रवाह मजबूत है और FCNR(B) जमा $100 बिलियन तक पहुंच सकती है। इससे भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक युद्ध जारी रहता है और मुद्रास्फीति 5% के स्तर को पार कर जाती है, तो आरबीआई को अनिच्छा से ब्याज दरों में वृद्धि करनी पड़ सकती है।

क्या आप जानते हैं?: आरबीआई केवल रेपो रेट ही नहीं, बल्कि 'मनी सप्लाई' (Money Supply) को नियंत्रित करके भी मुद्रास्फीति को काबू में रख सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. कोर इन्फ्लेशन क्या है?
कोर इन्फ्लेशन वह मुद्रास्फीति दर है जिसमें खाद्य और ईंधन जैसे अस्थिर घटकों को शामिल नहीं किया जाता है।

2. क्या भविष्य में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं?
यदि मुद्रास्फीति 5% से अधिक बनी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां प्रतिकूल रहती हैं, तो आरबीआई दरों में वृद्धि कर सकता है।