केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने एक नई व्यवस्था लागू की है जिसके तहत समय सीमा चूकने वाले नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स मुआवजे का भुगतान करके अपनी ग्रिड कनेक्टिविटी बरकरार रख सकते हैं। यह कदम 5.3 GW क्षमता वाले उन प्रोजेक्ट्स के लिए संजीवनी साबित होगा जो समय पर चालू नहीं हो पाए थे।
- डेवलपर्स अब समय सीमा चूकने पर ग्रिड एक्सेस खोने के बजाय मुआवजा देकर समय विस्तार पा सकते हैं।
- भूमि और वित्त संबंधी देरी के लिए ₹1,000/MW प्रतिदिन और व्यावसायिक संचालन में देरी के लिए ₹3,000/MW प्रतिदिन का शुल्क लगेगा।
- कुल 5.3 GW की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता इस कनेक्टिविटी रद्दीकरण के जोखिम में थी।
केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के डेवलपर्स को एक बड़ी राहत प्रदान की है। अब उन परियोजनाओं को, जो भूमि अधिग्रहण, वित्त पोषण या व्यावसायिक संचालन की समय सीमा को पूरा करने में विफल रही हैं, अपनी ग्रिड कनेक्टिविटी बनाए रखने का मौका मिलेगा। पहले, ऐसी विफलताओं का परिणाम सीधे तौर पर ट्रांसमिशन एक्सेस का रद्दीकरण होता था, जिससे करोड़ों का निवेश जोखिम में पड़ जाता था।
केंद्रीय ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (CTUIL) के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5.3 गीगावाट (GW) की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता अक्टूबर तक कनेक्टिविटी खोने की कगार पर थी। कई डेवलपर्स ने CERC से अतिरिक्त समय की मांग की थी, क्योंकि वे परियोजना कार्यान्वयन के विभिन्न उन्नत चरणों में थे लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से समय सीमा पूरी नहीं कर पाए।
विस्तार के लिए पात्रता और शर्तें
CERC ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार सभी के लिए नहीं होगा। डेवलपर्स को अपनी प्रगति साबित करनी होगी। उदाहरण के लिए, भूमि और वित्त विस्तार के लिए, डेवलपर को आवश्यक भूमि का कम से कम 20% हिस्सा दिखाना होगा। व्यावसायिक संचालन तिथि (COD) के विस्तार के लिए, परियोजना के प्रकार के आधार पर 50% से 75% भूमि दस्तावेजों को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह आवेदन मूल समय सीमा से कम से कम 15 कार्य दिवस पहले करना होगा।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रिड कनेक्टिविटी एक 'दुर्लभ संसाधन' (scarce resource) है। यदि कंपनियां बिना किसी वास्तविक प्रगति के इसे दबाकर रखती हैं, तो अन्य कुशल डेवलपर्स को अवसर नहीं मिलता। मुआवजे की यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि केवल गंभीर डेवलपर्स ही सिस्टम में बने रहें, जबकि देरी की लागत का उपयोग अन्य उपयोगकर्ताओं के मासिक ट्रांसमिशन शुल्क को कम करने के लिए किया जाएगा।
"यह नियामक बदलाव भारत के 500GW गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह निवेश की सुरक्षा और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाता है।"
समय सीमा के विस्तार की अवधि भी निर्धारित की गई है: भूमि आवश्यकताओं के लिए अधिकतम 3 महीने, वित्त पोषण के लिए 6 महीने और प्रोजेक्ट कमीशनिंग के लिए 12 महीने तक का समय दिया जा सकता है। यदि इस विस्तारित अवधि के बाद भी लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं, तो ग्रिड कनेक्टिविटी और बैंक गारंटी दोनों जब्त कर लिए जाएंगे।
| देरी का प्रकार | मुआवजा दर (प्रति MW/दिन) | अधिकतम विस्तार अवधि |
|---|---|---|
| भूमि और वित्त (Land & Finance) | ₹1,000 | 3-6 महीने |
| व्यावसायिक संचालन (COD) | ₹3,000 | 12 महीने |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या सभी डेवलपर्स को समय विस्तार मिलेगा?
नहीं, केवल उन्हीं को मिलेगा जो न्यूनतम भूमि अधिग्रहण (20%-75%) की शर्त पूरी करेंगे और समय सीमा से 15 दिन पहले आवेदन करेंगे।
2. जुर्माने के रूप में एकत्र किए गए पैसे का क्या होगा?
COD देरी से प्राप्त 100% और भूमि/वित्त देरी से प्राप्त 50% मुआवजे का उपयोग अन्य उपयोगकर्ताओं के ट्रांसमिशन शुल्क को कम करने के लिए किया जाएगा।