भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा FCNR(B) स्वैप सुविधा को निर्धारित समय से एक महीने पहले समाप्त करने के निर्णय का बैंकरों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य की देनदारियों को नियंत्रित करने के लिए एक समझदारी भरा निर्णय है।

  • RBI ने FCNR(B) स्वैप विंडो को 30 सितंबर के बजाय 31 अगस्त को बंद करने का निर्णय लिया है।
  • बैंकरों ने इस कदम को 'विवेकपूर्ण' बताया है क्योंकि यह भविष्य की देनदारियों को कम करेगा।
  • इस योजना के तहत अब तक लगभग $52.3 बिलियन का फंड जुटाया जा चुका है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, हेजिंग की लागत RBI के लिए कुल जमा राशि का लगभग 15% हो सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) जमा के लिए रियायती स्वैप सुविधा को नियोजित समय से एक महीने पहले, यानी 31 अगस्त को बंद करने के अचानक निर्णय ने बाजारों में हलचल मचा दी है। हालांकि, बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इस कदम को 'विवेकपूर्ण' करार दिया है। उनका मानना है कि यह कदम बैंक की भविष्य की देनदारियों को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक था।

एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के अधिकारी ने जानकारी दी कि उनके $2 बिलियन के आंतरिक लक्ष्य को पहले ही प्राप्त कर लिया गया है। अन्य बैंक अधिकारियों का कहना है कि वे अपने लक्ष्यों के बहुत करीब हैं। बैंकिंग जगत में यह चर्चा है कि FCNR(B) जमा अंततः एक देनदारी (Liability) है, और इसे समय पर सीमित करना वित्तीय स्थिरता के लिए अच्छा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस योजना ने भारतीय बैंकों को भारी मात्रा में विदेशी पूंजी जुटाने में मदद की है। 13 अगस्त तक, बैंकों ने इस माध्यम से $52.3 बिलियन जुटा लिए थे, और उम्मीद है कि महीने के अंत तक यह आंकड़ा $72 बिलियन के करीब पहुंच जाएगा। यह पूंजी भंडार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान करता है।

RBI द्वारा हेजिंग लागत वहन करने के कारण, कुल जमा राशि का लगभग 15% हिस्सा लागत के रूप में जा सकता है।

एसबीआई (SBI) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष ने एक रिपोर्ट में उल्लेख किया कि हालांकि हेजिंग की लागत (जो लगभग $10.5 बिलियन हो सकती है) बड़ी दिखती है, लेकिन भारत के $700 बिलियन के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले यह काफी कम है। उन्होंने यह भी नोट किया कि 2013 के 'टेपर टेंट्रम्स' के विपरीत, इस बार रुपये की स्थिति में वैसा बड़ा सुधार नहीं देखा गया है, जो एक चिंता का विषय हो सकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ

सितंबर 2013 में, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता (Taper Tantrums) आई थी, तब RBI ने इसी तरह की एक योजना शुरू की थी। उस समय बैंकों ने लगभग $26 बिलियन जुटाए थे। वर्तमान योजना का उद्देश्य भी विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करना और रुपये को सहारा देना था।

Did You Know?: FCNR(B) जमा के माध्यम से एनआरआई (NRI) को 15% तक का रिटर्न मिल रहा है, क्योंकि बैंक इसमें लीवरेज का लाभ उठाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. FCNR(B) स्वैप विंडो कब बंद हो रही है?
यह सुविधा अब 31 अगस्त को बंद हो जाएगी, जबकि पहले इसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर थी।

2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाना और भारतीय रुपये की स्थिति को मजबूत करना था।