अफ्रीकी विकास बैंक (AfDB) की नई रिपोर्ट के अनुसार, मोरक्को ने औद्योगिक विकास में दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि महाद्वीप का विनिर्माण क्षेत्र बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसकी हिस्सेदारी अभी भी बहुत कम है।

  • मोरक्को ने औद्योगिक सूचकांक में दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है।
  • अफ्रीका का विनिर्माण मूल्य 2020 के $285 बिलियन से बढ़कर 2025 में $351 बिलियन हो गया है।
  • वैश्विक विनिर्माण उत्पादन में अफ्रीका की हिस्सेदारी अभी भी 2% से कम है।
  • केन्या जैसे देशों में उच्च बिजली लागत और कम उत्पादकता बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

अफ्रीका के विकास एजेंडे में औद्योगीकरण हमेशा से एक प्रमुख मुद्दा रहा है। स्वतंत्रता के दशकों बाद भी, केवल कुछ ही अफ्रीकी देश वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में सफलतापूर्वक एकीकृत हो पाए हैं। अफ्रीकी विकास बैंक (AfDB) द्वारा जारी 'अफ्रीका इंडस्ट्रियलाइजेशन इंडेक्स 2025' से पता चलता है कि महाद्वीप में औद्योगिक परिवर्तन की गति अभी भी धीमी है, हालांकि इसमें सकारात्मक रुझान देखे जा रहे हैं।

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अफ्रीका में निर्मित वस्तुओं का मूल्य 2020 में $285 बिलियन था, जो 2025 में बढ़कर $351 बिलियन हो गया है। यह 24% की वृद्धि तो है, लेकिन वैश्विक तुलना में यह बहुत कम है। वर्तमान में, अफ्रीका वैश्विक विनिर्माण उत्पादन में 2% से भी कम और वैश्विक विनिर्माण निर्यात में केवल 1.4% का योगदान देता है। तुलना के लिए, अफ्रीका का कुल विनिर्माण आउटपुट जर्मन ऑटोमेकर Volkswagen की वार्षिक बिक्री से भी कम है।

मोरक्को का उदय और दक्षिण अफ्रीका का पतन

इस रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात मोरक्को का उदय है। मोरक्को ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ते हुए महाद्वीप की अग्रणी औद्योगिक अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त कर लिया है। मोरक्को ने इंडेक्स में 0.8415 का स्कोर प्राप्त किया, जबकि दक्षिण अफ्रीका 0.8396 पर रहा। मोरक्को की इस सफलता का मुख्य कारण उसकी मजबूत औद्योगिक नीति, निर्यात विविधीकरण और निरंतर औद्योगिक उन्नयन है।

मोरक्को ने अपनी निरंतर औद्योगिक नीतियों और निर्यात विविधीकरण के माध्यम से दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ते हुए महाद्वीप की अग्रणी औद्योगिक अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल कर लिया है।

क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो उत्तर अफ्रीका के देश, जैसे मोरक्को, औद्योगिक विकास में सबसे आगे हैं। पश्चिम अफ्रीका में सेनेगल, कोटे डी आइवर और नाइजीरिया जैसे देश अग्रणी हैं, जबकि पूर्वी अफ्रीका में केन्या, युगांडा और तंजानिया का दबदबा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, अफ्रीका का औद्योगिक भविष्य केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि लागत दक्षता और बुनियादी ढांचे में सुधार पर निर्भर करता है। यदि अफ्रीकी देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी ऊर्जा लागत और श्रम उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

केन्या के मामले में, विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 1990 के दशक के 15% से घटकर अब केवल 7.2% रह गया है। इसका एक बड़ा कारण बिजली की अत्यधिक लागत है। केन्या में औद्योगिक बिजली दर $0.18 से $0.23 प्रति kWh है, जो मोरक्को और इथियोपिया जैसे देशों की तुलना में बहुत अधिक है।

देशऔद्योगिक बिजली दर (प्रति kWh)स्थिति
इथियोपिया$0.01 - $0.02अत्यधिक कम
मोरक्को$0.09 - $0.12प्रतिस्पर्धी
केन्या$0.18 - $0.23अत्यधिक उच्च

विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल न्यूनतम मजदूरी पर ध्यान देने के बजाय, सरकारों को श्रम उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। जब तक उत्पादकता नहीं बढ़ेगी, तब तक कम लागत वाले श्रम के बावजूद अफ्रीकी देश चीन या भारत जैसे देशों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।

Frequently Asked Questions

1. मोरक्को ने दक्षिण अफ्रीका को कैसे पछाड़ा?
मोरक्को ने अपनी मजबूत औद्योगिक नीतियों, निर्यात में विविधता लाने और निरंतर तकनीकी उन्नयन के माध्यम से यह उपलब्धि हासिल की है।

2. अफ्रीका के लिए विनिर्माण में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
कमजोर बुनियादी ढांचा, उच्च ऊर्जा लागत और कम श्रम उत्पादकता अफ्रीका के औद्योगिक विकास में सबसे बड़ी बाधाएं हैं।

Did You Know?: अफ्रीका का कुल विनिर्माण आउटपुट ($351bn) दुनिया की दिग्गज कार कंपनी फॉक्सवैगन की वार्षिक बिक्री से भी कम है।