भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने धनू बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड पर फंड राउंड ट्रिपिंग और फर्जी ऋण बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। कंपनी पर महज 8 दिनों में 46 लेनदेन के जरिए ₹1000 करोड़ का फर्जी असुरक्षित ऋण दिखाने का आरोप है।
- SEBI ने धनू बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड पर फंड राउंड ट्रिपिंग और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
- कंपनी ने 8 दिनों के भीतर 46 लेनदेन के माध्यम से ₹1000 करोड़ का फर्जी असुरक्षित ऋण बनाया।
- सुरेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में पहचाना गया है।
- SEBI ने कंपनी और इसके मालिकों पर पूंजी बाजार में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए पूर्व NBFC फर्म धनू बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड (DBIL) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। SEBI के अंतरिम आदेश के अनुसार, कंपनी ने 'राउंड ट्रिपिंग' (फंड को घुमाकर वापस लाना) और फर्जी असुरक्षित ऋणों के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी करने की कोशिश की थी।
घोटाले का तरीका: 8 दिन और ₹1000 करोड़
जांच में यह पाया गया कि धनू बिल्डकॉन ने मात्र आठ दिनों की अवधि के भीतर 46 अलग-अलग लेनदेन किए। इन लेनदेन के माध्यम से कंपनी की किताबों में ₹1000 करोड़ का एक काल्पनिक असुरक्षित ऋण (Unsecured Loan) दिखाया गया। इसके बाद, इस राशि का लगभग ₹840 करोड़ 'पसंदीदा आवंटन' (Preferential Allotment) के जरिए इक्विटी शेयरों में बदल दिया गया। इस हेरफेर के परिणामस्वरूप, छह ऐसी संस्थाओं ने DBIL के 99.70% बकाया शेयरों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया, जिनका वास्तव में कोई भौतिक अस्तित्व ही नहीं था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की राउंड ट्रिपिंग गतिविधियां बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती हैं। जब शेल कंपनियां (Shell Companies) बिना किसी वास्तविक आधार के बड़ी मात्रा में इक्विटी हासिल कर लेती हैं, तो यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस की विफलता का संकेत है। SEBI की यह कार्रवाई बाजार में सफाई करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
फंड का इस तरह का चक्रीय प्रवाह बाजार की अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा है, जिसे रोकने के लिए सख्त नियामक निगरानी अनिवार्य है।
SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने आदेश में स्पष्ट किया कि सुरेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। जांच में यह भी सामने आया कि ₹25.05 करोड़ की राशि को बार-बार नेटवर्क के माध्यम से घुमाया गया और अंततः वापस DBIL में भेज दिया गया, जबकि धन के वास्तविक स्रोत का पता नहीं लगाया जा सका।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राउंड ट्रिपिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पैसा एक संस्था से निकलकर कई परतों (layers) के माध्यम से घूमता है और अंततः उसी संस्था या उससे जुड़ी संस्था के पास वापस आ जाता है। इसका उपयोग अक्सर कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग या बैलेंस शीट को कृत्रिम रूप से मजबूत दिखाने के लिए किया जाता है।
Frequently Asked Questions
1. SEBI ने धनू बिल्डकॉन पर क्या प्रतिबंध लगाए हैं?
SEBI ने धनू बिल्डकॉन को किसी भी प्रत्यक्ष कॉर्पोरेट कार्रवाई करने से रोक दिया है और इसके मालिकों पर पूंजी बाजार में प्रतिबंधित कर दिया है।
2. इस घोटाले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
SEBI के अनुसार, सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता हैं।