कपास सूत की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने करूर के होम टेक्सटाइल निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन हफ्तों में कीमतों में 10% का नया उछाल आया है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।

  • कपास सूत की कीमतों में पिछले तीन हफ्तों में 10% की और वृद्धि हुई है।
  • करूर का टेक्सटाइल उद्योग मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप को निर्यात करता है।
  • भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे माल और पेट्रोलियम उत्पादों की लागत भी बढ़ी है।
  • केंद्र द्वारा आयात शुल्क हटाने के बावजूद स्थानीय निर्माताओं को राहत नहीं मिली है।

तमिलनाडु के करूर में स्थित होम टेक्सटाइल उद्योग इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। कपास सूत, जो इस उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है, की कीमतों में निरंतर हो रही वृद्धि ने निर्माताओं और निर्यातकों के सामने अस्तित्व का प्रश्न खड़ा कर दिया है। उद्योग के सूत्रों के अनुसार, पिछले मात्र तीन हफ्तों के भीतर सूत की कीमतों में 10% का नया उछाल देखा गया है, जिसने पहले से ही संघर्ष कर रहे निर्माताओं की कमर तोड़ दी है।

लागत में भारी वृद्धि और वैश्विक प्रभाव

करूर के टेक्सटाइल निर्माता मुख्य रूप से कोयंबटूर, डिंडीगुल, विरुधुनगर और वेल्लाकोइल की मिलों से कपास सूत प्राप्त करते हैं। जून के दौरान, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण कीमतों में 30% से 40% तक की भारी वृद्धि देखी गई थी। उच्च काउंट वाले सूत की कीमत ₹300 से बढ़कर ₹400 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। हालांकि केंद्र सरकार ने उद्योग की मांग पर कपास सूत पर आयात शुल्क हटा दिया था, लेकिन करूर के व्यापारियों का कहना है कि इस कदम का लाभ मुख्य रूप से तिरुप्पुर के गारमेंट निर्माताओं को मिला है, न कि करूर के होम टेक्सटाइल क्षेत्र को।

कपास सूत की लगातार बढ़ती कीमतें न केवल परिचालन लागत को बढ़ाती हैं, बल्कि खरीदारों और निर्यातकों के बीच के संबंधों पर भी दबाव डालती हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह संकट?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह समस्या केवल कच्चे माल तक सीमित नहीं है। करूर के निर्माता, जो मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप को निर्यात करते हैं, वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव के प्रभाव से भी जूझ रहे हैं। इसके कारण पॉलिएस्टर जैसे पेट्रोलियम आधारित उत्पादों, रंगाई उद्योगों में उपयोग होने वाले रसायनों, पॉलीथीन और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

करूर ऐतिहासिक रूप से भारत के महत्वपूर्ण टेक्सटाइल हब में से एक रहा है, जो विशेष रूप से घरेलू कपड़ों (Home Textiles) के लिए जाना जाता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान का सीधा असर यहाँ के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर पड़ता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग पर निर्भर हैं।

Did You Know?: करूर का होम टेक्सटाइल क्लस्टर वैश्विक स्तर पर बेड लिनन और तौलिये के निर्यात में एक प्रमुख स्थान रखता है।

Frequently Asked Questions

1. कपास सूत की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान कीमतों में वृद्धि के मुख्य कारण हैं।

2. करूर के उद्योग का मुख्य बाजार कौन सा है?
करूर का टेक्सटाइल उद्योग मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोपीय देशों को निर्यात करता है।