भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा ने जबरदस्त सफलता हासिल की है, जिसके तहत 21 अगस्त तक 72.85 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ है। इसमें FCNR(B) जमा राशि की सबसे बड़ी भूमिका रही है।
- RBI की विशेष स्वैप सुविधा ने 21 अगस्त तक कुल $72.85 बिलियन का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित किया।
- FCNR(B) जमा राशि का योगदान सबसे अधिक $65.397 बिलियन रहा।
- RBI ने मजबूत प्रतिक्रिया को देखते हुए सुविधा को समय से पहले 31 अगस्त को बंद करने का निर्णय लिया।
- यह प्रवाह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा के प्रवाह में एक मील का पत्थर स्थापित किया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त तक इस योजना के माध्यम से कुल $72.85 बिलियन का विदेशी मुद्रा प्रवाह प्राप्त हुआ है। यह सफलता केंद्रीय बैंक के उस कदम को रेखांकित करती है जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा तरलता को बढ़ाना और रुपये को स्थिरता प्रदान करना था।
विदेशी मुद्रा प्रवाह का विश्लेषण
डेटा से पता चलता है कि इस भारी निवेश में Foreign Currency Non-Resident (Bank) यानी FCNR(B) जमा का सबसे बड़ा हाथ रहा है, जिसने कुल प्रवाह में $65.397 बिलियन का योगदान दिया। इसके अलावा, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बरोइंग (OFCBs) से $4.86 बिलियन और एक्सटर्नल कमर्शियल बरोइंग (ECBs) से $2.591 बिलियन प्राप्त हुए।
RBI ने इस योजना की सफलता और उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए, इसकी समय सीमा को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त करने का निर्णय लिया। हालांकि, FCNR(B) जमा के खिलाफ किए गए स्वैप का काम 11 सितंबर तक जारी रह सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा का आना भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव का कहना है कि वर्तमान में डॉलर-रुपया 95 के स्तर पर स्थिर है और पोर्टफोलियो प्रवाह भी वापस लौट रहा है, जिससे नीति निर्माताओं के लिए अतिरिक्त सहायता उपायों की तत्काल आवश्यकता कम हो गई है।
मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार के 10-12% के बराबर यह प्रवाह भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करने के लिए पर्याप्त है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हालांकि हेजिंग की लागत (जो RBI द्वारा वहन की जाती है) अधिक हो सकती है, लेकिन प्राप्त फंड की मात्रा इतनी पर्याप्त है कि यह लागत को न्यायसंगत बनाती है। SBI रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि $70 बिलियन जुटाए जाते हैं, तो हेजिंग की संभावित लागत लगभग $10.5 बिलियन हो सकती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
RBI ने 8 जून को इस विशेष USD-रुपया रियायती स्वैप सुविधा की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना था। FCNR(B) जमा गैर-निवासी भारतीयों (NRIs) और ओसीआई (OCI) द्वारा विदेशी मुद्राओं में की जाने वाली जमा राशि है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली को विदेशी मुद्रा संसाधन प्रदान करती है।
Frequently Asked Questions
1. FCNR(B) जमा क्या है?
यह गैर-निवासी भारतीयों द्वारा विदेशी मुद्राओं (जैसे USD, GBP, EUR) में की जाने वाली एक निश्चित अवधि की जमा राशि है।
2. RBI ने इस सुविधा को समय से पहले क्यों बंद किया?
विदेशी मुद्रा के अत्यधिक और उत्साहजनक प्रवाह को देखते हुए RBI ने इसे 31 अगस्त को ही समाप्त करने का निर्णय लिया।