भारत ने जापान के साथ 2011 के व्यापार समझौते की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि बढ़ते व्यापार अंतर को कम किया जा सके और अगले दस वर्षों में 10 ट्रिलियन येन (लगभग $62 अर्ब) का निवेश सुनिश्चित किया जा सके। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी व्यापारियों को भारत में स्थानीयकरण बढ़ाने और नवाचार में सहयोग करने का आह्वान किया।
- भारत-जापान 2011 के समझौते की व्यापक समीक्षा
- आगामी 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य
- स्थानीयकरण और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति
नई दिल्ली – वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में 220 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों की भारतीय टीम 24 से 27 अगस्त तक जापान में व्यापार और निवेश को गहरा करने के उद्देश्य से मौजूद है। सरकार ने कहा है कि वह 2011 के भारत-जापान व्यापार समझौते को पुनः देखेगी, ताकि दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार अंतर को पाटा जा सके और अगले दशक में 10 ट्रिलियन येन (लगभग $62 अर्ब) का निवेश आकर्षित किया जा सके।
पिछला समझौता और वर्तमान चुनौतियाँ
2011 में हस्ताक्षरित इस समझौते ने दोनों पक्षों को मुक्त व्यापार के अवसर प्रदान किए थे, लेकिन वर्षों के दौरान व्यापार अंतर बढ़ता गया। भारत को वर्तमान में जापान से आयात में अधिशेष का सामना करना पड़ रहा है, जबकि निर्यात में वृद्धि अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाई है। इस संदर्भ में, गोयल ने कहा कि "आज हमारे पास $17 ट्रिलियन मूल्य के मुक्त व्यापार समझौते और प्राथमिक बाजार पहुंच है, लेकिन हमें इन्हें अधिकतम उपयोग में लाना है।"
निवेश का नया रोडमैप
गोयल ने तीन प्रमुख सुझाव पेश किए: 1) भारत के कम लागत वाले एफटीए को उपयोग करके लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, 2) जापानी कंपनियों को भारत में स्थानीयकरण को गहरा करना, और 3) नवाचार फंडिंग में सरकारी समर्थन प्रदान करना। उन्होंने सुईकाई मोटर कॉरपोरेशन की 1980 के दशक की पहली बड़ी निवेश को उदाहरण के रूप में दिया, जहाँ आज भारतीय बाजार में सुईकाई की मार्केट कैप मूल कंपनी से 1.6 गुना अधिक है।
व्यापारिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा
राउंडटेबल में जापानी कंपनियों द्वारा उठाए गए सुरक्षा उपायों को देखते हुए, गोयल ने भारतीय स्टील को प्राथमिक स्रोत बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "हम केवल कम लागत वाले बाजार के लिए सुरक्षा उपाय अपनाते हैं, जो भारत में उपलब्ध है।" इस दौरान, निक्केई एशिया के मुख्य संपादक अकीतो ताकाना के साथ एक फायरसाइड चैट में उन्होंने भारत की "सुनने वाली सरकार" की छवि को उजागर किया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that narrowing the India‑Japan trade gap and unlocking $62 bn of investment could propel India toward its $30 trillion GDP target by 2047, while providing Japanese firms a stable gateway to the fast‑growing Asian market.
"जापानी कंपनियों के लिए भारत में स्थानीयकरण न केवल लागत घटाएगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ाएगा," कहा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ डॉ. अंजलि मेहरा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत‑जापान विशेष रणनीतिक व वैश्विक भागीदारी 2014 में स्थापित हुई, जिसके तहत दोनों देशों ने ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। 2011 के व्यापार समझौते ने इस साझेदारी को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया, लेकिन अब समय आ गया है कि इस समझौते को नई वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप अपडेट किया जाए।
Frequently Asked Questions
Q1: 10 ट्रिलियन येन निवेश का मुख्य फोकस कौन‑से क्षेत्रों में होगा?
A: मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, उन्नत विनिर्माण, फिनटेक, और एयरोस्पेस क्षेत्रों में।
Q2: इस समीक्षा के बाद व्यापार अंतर को कितनी जल्दी पाटा जा सकता है?
A: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई नीतियां तुरंत लागू हों तो अगले 3‑5 वर्षों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।