पिछले छह महीनों में कपास और यार्न की कीमतों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय परिधान निर्यातकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एपीईसी के अध्यक्ष ने निर्यात प्रतिस्पर्धा बचाने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।
- कॉटन यार्न की कीमतें जनवरी से 60% बढ़ी
- निर्यातकों को मौजूदा अनुबंधों में कीमतें घटाने की अनुमति नहीं
- बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा तेज़ी से बढ़ रही है
कॉटन और यार्न की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी
कोयंबटूर में 29 अगस्त, 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कपास और यार्न की कीमतों में पिछले छह महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय वस्त्र निर्यात श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है। एपीईसी (Apparel Export Promotion Council) के अध्यक्ष ए. सक्थिवेल ने कहा कि यार्न निर्यात को नियंत्रित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाना चाहिए।
विस्तृत मूल्य वृद्धि
जनवरी से कपास यार्न की कीमतें लगभग 60% बढ़ी हैं। त्रिप्पुर के एक वस्त्र निर्यातक, आर. सक्थिवेल, ने बताया कि मार्च में कीमत प्रति किलोग्राम 7 रुपये बढ़ी, जबकि अगस्त में यह वृद्धि 17 रुपये से अधिक रही। कुल मिलाकर, पिछले छह महीनों में कीमत में 60‑70 रुपये का अंतर आया है, जिससे निर्यातकों के मौजूदा मूल्य अनुबंध प्रभावित हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा पर असर
बांग्लादेश में आपूर्ति व उत्पादन समस्याओं के कारण कई अंतरराष्ट्रीय परिधान आयातकों ने भारत को वैकल्पिक स्रोत के रूप में देखना शुरू किया। परंतु, यार्न कीमतों में निरंतर वृद्धि के कारण भारत और बांग्लादेश के बीच मूल्य अंतर बढ़ गया, जिससे कुछ ऑर्डर अन्य प्रतिस्पर्धी देशों को चले गए।
उत्पादकों का तर्क
टेक्सटाइल मिलों का कहना है कि कपास कीमतों में उछाल ही यार्न कीमतों के बढ़ने का मुख्य कारण है। शंकर 6 किस्म की कपास की कीमतें पिछले छह महीनों में 26% बढ़ी हैं, जो पूरी उद्योग को प्रभावित कर रही है। छोटे एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयाँ अब बड़े पैमाने पर यार्न खरीद नहीं पा रही हैं, जिससे उत्पादन लागत और भी बढ़ रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि कीमतों में नियंत्रण नहीं किया गया तो भारत की वस्त्र निर्यात क्षमता में 15% तक गिरावट आ सकती है, जिससे लाखों रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
"कॉटन और यार्न की कीमतों में स्थिरता न लाने से भारत की वस्त्र निर्यात प्रतिस्पर्धा दीर्घकालिक रूप से कमजोर हो जाएगी," कहता है अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ डॉ. रवीन्द्र सिंह।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सरकार यार्न निर्यात पर कोई प्रतिबंध लगा सकती है?
उत्तर: वर्तमान में कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, परंतु एपीईसी ने नियामक कदमों की मांग की है।
प्रश्न 2: कपास की कीमतों में गिरावट कब संभव होगी?
उत्तर: वैश्विक बाजार स्थितियों और मौसमी उत्पादन पर निर्भर करता है; अनुमानतः अगले दो साल में स्थिरता आ सकती है।