एक नए सर्वे के अनुसार, 41% व्यापारी UPI के उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर MDR शुल्क वहन करने को तैयार नहीं हैं, जबकि 53% उपभोक्ता शुल्क लगने पर UPI छोड़ने की बात कह रहे हैं।

  • 41% व्यापारियों ने ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर किसी भी MDR शुल्क को स्वीकार करने से इनकार किया।
  • सर्वे के अनुसार, 53% उपभोक्ता शुल्क लागू होने पर अन्य भुगतान माध्यमों की ओर रुख कर सकते हैं।
  • UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने की वार्षिक लागत ₹5,000-6,000 करोड़ अनुमानित है।

भारत में डिजिटल भुगतान की क्रांति लाने वाले Unified Payments Interface (UPI) के भविष्य पर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्षों से भारतीय उपभोक्ता और व्यापारी बिना किसी शुल्क के इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन अब केंद्र सरकार कुछ उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है।

LocalCircles द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंताएं जताई हैं। सर्वे में पाया गया कि केवल 17% व्यापारी ही ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.3% या उससे अधिक का MDR शुल्क वहन करने के इच्छुक हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 41% व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार का MDR शुल्क नहीं देंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह स्थिति एक 'डेडलॉक' की ओर इशारा करती है। यदि सरकार MDR लागू करती है, तो व्यापारी या तो कीमतों में वृद्धि करेंगे या इस शुल्क को 'सुविधा शुल्क' के रूप में ग्राहकों पर डाल देंगे। चूंकि UPI अब भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है, किसी भी छोटे से शुल्क का प्रभाव करोड़ों छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

"UPI की सफलता इसकी 'जीरो-कॉस्ट' प्रकृति में निहित थी; किसी भी शुल्क का परिचय डिजिटल वित्तीय समावेशन की गति को धीमा कर सकता है।"

सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR व्यापारियों के लिए होगा, न कि उपभोक्ताओं के लिए। हालांकि, कानूनी ढांचे में यह स्पष्ट नहीं है कि क्या व्यापारी इस लागत को ग्राहकों से वसूल सकते हैं। यह स्थिति स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी पोर्टल्स जैसे क्षेत्रों में अधिक जटिल हो सकती है जहां भुगतान अक्सर ₹2,000 की सीमा को पार कर जाते हैं।

एक अन्य सर्वे में यह खुलासा हुआ कि 53% उपभोक्ता शुल्क लगने की स्थिति में UPI से दूरी बना लेंगे। इनमें से 27% क्रेडिट कार्ड और 14% डेबिट कार्ड की ओर लौटने की बात कह रहे हैं, जो डिजिटल इंडिया के 'कैशलेस' विजन के लिए एक चुनौती हो सकता है।

विकल्पव्यापारियों की प्रतिक्रियाउपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
MDR शुल्क वहन करनाकेवल 17% तैयार12% शुल्क देने को तैयार
वैकल्पिक माध्यमकीमतें बढ़ा सकते हैं53% अन्य माध्यम चुनेंगे
क्या आप जानते हैं?: जनवरी 2020 में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने UPI पर 'जीरो MDR' नीति लागू की थी, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर सबसे सफल भुगतान प्रणालियों में से एक बना दिया।

Frequently Asked Questions

1. MDR शुल्क क्या है?
MDR वह शुल्क है जो बैंक या भुगतान प्रदाता व्यापारी से प्रत्येक लेनदेन पर वसूलते हैं।

2. क्या ग्राहकों को सीधे शुल्क देना होगा?
सरकार के अनुसार यह शुल्क व्यापारियों के लिए है, लेकिन व्यापारी इसे अप्रत्यक्ष रूप से कीमतों में जोड़कर ग्राहकों से वसूल सकते हैं।