बेंगलुरु में E20 पेट्रोल के लागू होने के बाद वाहन मालिकों को माइलेज में कमी और इंजन की खराबी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पुराने वाहनों के लिए यह बदलाव आर्थिक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

  • E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रण) के उपयोग से माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • पुराने वाहनों के इंजन में जंग और ईंधन लाइनों के खराब होने की समस्या बढ़ी है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल नमी सोखता है जिससे टैंक में गाढ़ा और संक्षारक कीचड़ जमा हो जाता है।
  • अप्रैल 2023 से पहले बने वाहनों पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

बेंगलुरु के लाखों वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार का स्वच्छ ऊर्जा जनादेश एक बड़ी सिरदर्द बन गया है। देश भर में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल और 80% जीवाश्म ईंधन का मिश्रण) के अनिवार्य उपयोग ने शहर के दैनिक यात्रियों को यांत्रिक खराबी, कम ईंधन दक्षता और बढ़ते मरम्मत बिलों के चक्रव्यूह में फंसा दिया है।

विशेष रूप से दोपहिया वाहनों और पुराने यात्री कारों के मालिकों ने वाहन के प्रदर्शन में भारी गिरावट की सूचना दी है। जे.पी. नगर के एक डिलीवरी कार्यकारी, के. विनय के अनुसार, नए ईंधन मिश्रण के आने के बाद से उनके स्कूटर का माइलेज लगभग 5 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। इतना ही नहीं, ट्रैफिक सिग्नल पर वाहन का अचानक बंद हो जाना और इंजन का झटका लेना अब एक आम समस्या बन गई है।

क्यों बढ़ रही हैं समस्याएं?

मैकेनिकों का कहना है कि उच्च सांद्रता वाला इथेनॉल इंजन के आंतरिक घटकों को नुकसान पहुँचा रहा है। बैनरघट्टा रोड पर एक वरिष्ठ मैकेनिक, एम. एंथोनी बताते हैं कि जो वाहन अप्रैल 2023 से पहले निर्मित हुए हैं, उनमें इथेनॉल के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता नहीं है। इससे फ्यूल इंजेक्टर का बंद होना, रबर गैस्केट का फटना और ईंधन लाइनों में जंग लगना जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

इथेनॉल हवा से नमी सोखता है, जिससे टैंक के नीचे एक संक्षारक कीचड़ जमा हो जाता है जो इंजन को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

बोजोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण से पता चलता है कि बेंगलुरु जैसे आर्द्र वातावरण वाले शहरों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। जब इथेनॉल हवा से पानी सोखता है, तो यह पानी और इथेनॉल का मिश्रण टैंक के निचले हिस्से में जमा हो जाता है, जिसे अक्सर लोग मिलावटी पेट्रोल समझ लेते हैं, जबकि यह रासायनिक प्रक्रिया का परिणाम है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत सरकार का लक्ष्य तेल आयात बिल को कम करना और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। इथेनॉल सम्मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रणनीतिक रूप से कदम उठाए हैं, लेकिन तकनीकी अनुकूलता के बिना इसका तीव्र कार्यान्वयन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

क्या आप जानते हैं?: इथेनॉल एक 'हाइग्रोस्कोपिक' पदार्थ है, जिसका अर्थ है कि यह वातावरण से नमी को अपनी ओर खींचता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: E20 पेट्रोल मेरे पुराने वाहन को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: पुराने वाहनों के रबर और प्लास्टिक के पुर्जे इथेनॉल के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिससे वे जल्दी खराब हो सकते हैं और ईंधन दक्षता कम हो सकती है।

प्रश्न 2: क्या यह समस्या केवल बेंगलुरु में है?
उत्तर: नहीं, यह पूरे देश में लागू है, लेकिन नमी वाले क्षेत्रों और पुराने वाहनों के घनत्व के कारण बेंगलुरु में इसकी रिपोर्ट अधिक है।