भारत के थर्मल पावर क्षेत्र में कोयला प्रबंधन एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। बिजली उत्पादकों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार पर्याप्त कोयला भंडार न रखना ग्रिड की स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

  • थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयला स्टॉक प्रबंधन एक प्रमुख चुनौती बन गया है।
  • कोयला उपलब्धता के बजाय, कुशल लॉजिस्टिक्स और इन्वेंट्री प्रबंधन की अधिक आवश्यकता है।
  • सरकार अब उन उत्पादकों की जवाबदेही तय करने पर विचार कर रही है जो स्टॉक मानदंडों का पालन नहीं करते।

भारत के थर्मल पावर क्षेत्र में वर्तमान में एक नया संकट उभर रहा है। यह संकट कोयले की कमी का नहीं, बल्कि कोयला स्टॉक प्रबंधन का है। बिजली उत्पादकों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिससे ग्रिड की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कोयला उत्पादन पर्याप्त है, लेकिन समस्या इसके वितरण और संयंत्र स्तर पर भंडारण में है। यदि कुछ बिजली संयंत्र पर्याप्त स्टॉक नहीं रखते हैं, तो सरकार को आपातकालीन स्थिति में अन्य संयंत्रों से कोयला पुनर्निर्देशित करना पड़ता है, जिससे उन संयंत्रों के साथ अन्याय होता है जो नियमों का पालन करते हैं।

कोयला इन्वेंट्री को सिस्टम विश्वसनीयता सेवा के रूप में पहचाना जाना चाहिए, जहाँ पर्याप्त स्टॉक रखने वाले उत्पादकों को प्रोत्साहित किया जाए।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के 2021 के ढांचे के अनुसार, प्रत्येक संयंत्र के लिए विशिष्ट स्टॉक मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, मई 2025 में स्वीकृत संशोधित SHAKTI नीति ने कोयला आवंटन को दो श्रेणियों (Window I और Window II) में विभाजित करके प्रक्रिया को सरल बनाया है।

लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला की जटिलता

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि केवल खदानों में कोयला होना ही पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती उत्पादन, लोडिंग, रेलवे की उपलब्धता, पारगमन (transit) और अंततः स्टॉकयार्ड प्रबंधन के बीच के तालमेल में है। कोयले की उपलब्धता खदान से सीधे बिजली संयंत्र तक नहीं पहुँचती; इसके लिए एक सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक्स श्रृंखला की आवश्यकता होती है।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत का कोयला उत्पादन पिछले दो वित्तीय वर्षों में 1 बिलियन टन से अधिक रहा है। हालांकि, संयंत्रों के स्तर पर स्टॉक का कुशल प्रबंधन ही ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

क्या आप जानते हैं?: भारत की कुल बिजली आपूर्ति में कोयला और लिग्नाइट आधारित संयंत्रों की हिस्सेदारी लगभग 69.54% है, जो ग्रिड की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. SHAKTI नीति क्या है?
यह सरकार द्वारा अनुमोदित एक नीति है जो कोयला आवंटन को दो श्रेणियों में विभाजित करती है, जिससे सरकारी और निजी दोनों उत्पादकों को कोयला प्राप्त करने में आसानी होती है।

2. कोयला स्टॉक प्रबंधन क्यों आवश्यक है?
ताकि बिजली की मांग बढ़ने पर अचानक आपूर्ति बाधित न हो और ग्रिड की स्थिरता बनी रहे।