आंध्र प्रदेश में खनन क्षेत्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹1,287 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। प्रमुख खनिजों से होने वाली आय में 53.50% की जबरदस्त वृद्धि देखी गई है।
- अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच कुल खनन राजस्व ₹1,287.33 करोड़ रहा।
- प्रमुख खनिजों से राजस्व में 53.50% की भारी वृद्धि दर्ज की गई।
- राज्य सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक GVA में खनन की हिस्सेदारी को 3.70% तक ले जाना है।
आंध्र प्रदेश के खान एवं भूविज्ञान मंत्री कोल्लू रवींद्र ने शुक्रवार को विजयवाड़ा में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान राज्य के खनन क्षेत्र की प्रगति का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त) में विभाग ने कुल ₹1,287.33 करोड़ का राजस्व एकत्र किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.90% अधिक है।
राजस्व में यह वृद्धि विशेष रूप से प्रमुख खनिजों (Major Minerals) के क्षेत्र में देखी गई है, जहां 53.50% का उछाल आया है। इसके विपरीत, लघु खनिजों (Minor Minerals) से प्राप्त राजस्व में 5.80% की मामूली वृद्धि हुई है। अकेले अगस्त महीने में विभाग ने ₹311.57 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
तकनीक और अन्वेषण का नया युग
मंत्री रवींद्र ने जोर देकर कहा कि राज्य अब खनन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। रिमोट मैपिंग के माध्यम से 126 खनिज क्षेत्रों की पहचान की गई है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के माध्यम से 49 अन्य क्षेत्रों का पता लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, 16 अन्य क्षेत्रों में MERIT (Mineral Exploration, Research & Innovation Trust) के तहत सक्रिय अन्वेषण चल रहा है।
राज्य सरकार भविष्य के महत्वपूर्ण संसाधनों की ओर भी देख रही है। कडापा बेसिन में लिथियम और गैलियम की संभावनाओं का पता लगाने के लिए CSIR-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। साथ ही, समुद्री रेत खनिज संसाधनों के दोहन के लिए 'ए.पी. टाइटेनियम और दुर्लभ पृथ्वी चुंबक नीति' भी तैयार की गई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आंध्र प्रदेश का खनन क्षेत्र अब केवल पारंपरिक संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक खनिजों (Critical Minerals) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य का लक्ष्य अपने सकल मूल्य वर्धित (GVA) में खनन की हिस्सेदारी को 2.09% से बढ़ाकर 2028-29 तक 3.70% करना है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
पारदर्शिता और उन्नत तकनीक का संगम ही आंध्र प्रदेश को वैश्विक खनिज मानचित्र पर स्थापित करेगा।
वर्ष 2025-26 में 21 प्रमुख खनिज खदानों की नीलामी की गई, जो 2015 में ई-नीलामी की शुरुआत के बाद से अब तक की सर्वाधिक संख्या है। यह दर्शाता है कि राज्य में निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं और प्रक्रियाएं अधिक सुव्यवस्थित हो रही हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आंध्र प्रदेश में प्रमुख खनिजों से राजस्व में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर: प्रमुख खनिजों से राजस्व में 53.50% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रश्न 2: राज्य सरकार का खनन क्षेत्र के लिए क्या लक्ष्य है?
उत्तर: सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक राज्य के GVA में खनन की हिस्सेदारी को 3.70% तक पहुंचाना है।