भारतीय परिवारों की वित्तीय बचत में वृद्धि हुई है, लेकिन कर्ज लेने की प्रवृत्ति उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ी है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बचत और अर्थव्यवस्था की तुलना में ऋण का बोझ तेजी से बढ़ रहा है।
- वित्तीय बचत के हर 100 रुपये के मुकाबले कर्ज बढ़कर 27 रुपये से 32 रुपये हो गया है।
- पिछले चार वर्षों में घरेलू ऋण में 78% की वृद्धि हुई, जबकि बचत केवल 49% बढ़ी।
- बैंक जमाओं का हिस्सा घटा है, जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा है।
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) से कर्ज लेने का चलन बढ़ा है, जो अधिक ब्याज वसूलती हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था के घरेलू संतुलन में एक चिंताजनक बदलाव देखा जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अगस्त 2026 के बुलेटिन के अनुसार, भारतीय परिवार बचत तो कर रहे हैं, लेकिन उनकी उधार लेने की आदत इस बचत की गति को पीछे छोड़ चुकी है। मार्च 2026 तक, भारतीय परिवारों के पास 490.3 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्ति थी, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 141.6 प्रतिशत है। हालांकि, उनके ऊपर 158.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जो GDP का 45.8 प्रतिशत है।
कर्ज की दौड़ में बचत पिछड़ी
जून 2022 से मार्च 2026 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि घरेलू ऋण में 78 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। इसी अवधि में बचत में केवल 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अर्थव्यवस्था 41 प्रतिशत की दर से बढ़ी। इसका सीधा अर्थ यह है कि कर्ज लेने की रफ्तार अर्थव्यवस्था की विकास दर से लगभग दोगुनी रही है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह प्रवृत्ति मध्यम वर्ग की बदलती जीवनशैली और क्रेडिट एक्सेस (Credit Access) में आसानी को दर्शाती है। जब कर्ज की वृद्धि दर बचत से अधिक होती है, तो परिवारों की वित्तीय लचीलापन (Financial Resilience) कम हो जाती है। बाजार में अस्थिरता या अचानक आने वाले खर्चों के समय ऐसे परिवार अधिक जोखिम में होते हैं।
बचत का बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन जब ऋण की वृद्धि दर अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देती है, तो यह दीर्घकालिक वित्तीय अस्थिरता का संकेत होता है।
बचत के स्वरूप में बदलाव
भारतीयों ने अपना पैसा रखने के तरीकों को बदला है। पारंपरिक बैंक जमा (Bank Deposits) अब वित्तीय संपत्तियों का केवल 34.4 प्रतिशत हैं, जो जून 2022 में 36 प्रतिशत थे। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो गई है। अब परिवारों की बचत का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार की उठापटक पर निर्भर है, जिससे जोखिम बढ़ गया है।
| श्रेणी (Category) | जून 2022 | मार्च 2026 |
|---|---|---|
| बैंक जमा हिस्सा | 36% | 34.4% |
| म्यूचुअल फंड हिस्सा | 6.4% | 10.5% |
| ऋण (प्रति 100 रु बचत) | 27 रु | 32 रु |
ऋण का बढ़ता बोझ और जोखिम
हालांकि बैंकों का कर्ज अभी भी 81.3 प्रतिशत है, लेकिन गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं (Non-bank lenders) की हिस्सेदारी 9.8 प्रतिशत से बढ़कर 13.3 प्रतिशत हो गई है। चूंकि NBFCs आमतौर पर बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज लेते हैं, इसलिए परिवारों की मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा अब ब्याज चुकाने में जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या भारतीयों ने बचत करना बंद कर दिया है?
नहीं, बचत बढ़ी है, लेकिन कर्ज बढ़ने की रफ्तार बचत और GDP विकास दर दोनों से कहीं अधिक है।
2. गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं से कर्ज लेना जोखिम भरा क्यों है?
क्योंकि ये संस्थान अक्सर बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज दरें वसूलते हैं, जिससे कर्जदार पर वित्तीय दबाव बढ़ता है।