नवम्बर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फ़ोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिये अनिवार्य हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों की आर्थिक शक्ति दो गुना तेज़ी से बढ़ रही है और इस सहयोग से नवाचार तथा व्यापारिक अवसरों में वृद्धि होगी।
- नौवहन स्वतंत्रता और नाविक सुरक्षा वैश्विक व्यापार के लिये आवश्यक
- ब्रिक्स देशों की जीडीपी 4.5 गुना बढ़ी, वैश्विक औसत से दो गुना तेज़
- नवाचार, निवेश और प्रतिभा आदान‑प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता
नई दिल्ली – ब्रिक्स बिजनेस फ़ोरम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को वैश्विक आर्थिक स्थिरता की कुंजी कहा। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों में व्यवधान और आपूर्ति श्रृंखला की असुरक्षा से विश्व व्यापार में गंभीर जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं।
मोदी ने बताया कि ब्रिक्स देशों की जनसंख्या विश्व की आधी और वैश्विक जीडीपी का 40% हिस्सा है, जबकि उनका वैश्विक व्यापार में हिस्सा 25% से अधिक है। यह आंकड़े इस समूह की बढ़ती आर्थिक महत्ता को रेखांकित करते हैं।
इतिहासिक पृष्ठभूमि: 2010 में स्थापित ब्रिक्स, प्रारम्भ में चार देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन) से बना था, और बाद में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ। पिछले दशक में समूह ने आर्थिक सहयोग को गहरा किया, जिससे उनका सामूहिक जीडीपी 1990 के स्तर से लगभग 4.5 गुना बढ़ा है। यह वृद्धि वैश्विक औसत 2.5 गुना से अधिक तेज़ रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स अब सिर्फ आर्थिक मंच नहीं, बल्कि नवाचार के हब बन रहे हैं। वे ग्रासरूट पहल से लेकर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी तक के क्षेत्रों में नई समाधान विकसित कर रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन बढ़ेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा में कोई भी व्यवधान वैश्विक वस्तु कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और विकासशील देशों की निर्यात आय पर सीधा असर डालता है। इसलिए, ब्रिक्स की सामूहिक पहलें अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए स्थिरता की गारंटी बन सकती हैं।
"समुद्री सुरक्षा को मजबूती से सुनिश्चित करना वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार की पहली सीढ़ी है," कहा अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अन्ना पॉल।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ब्रिक्स देशों द्वारा नौवहन सुरक्षा को बढ़ाने के लिये कौन‑से कदम उठाए जा रहे हैं?
उत्तर: संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभ्यास, पोर्ट सुरक्षा मानकों का सामंजस्य, और समुद्री कर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
प्रश्न 2: भारत की इस पहल से छोटे और मध्यम उद्यमों को क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: बेहतर आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और नई तकनीकों तक पहुंच से लागत में कमी और बाजार विस्तार के अवसर मिलेंगे।