तमिलनाडु के कपड़ा मिल और गारमेंट निर्माता कपास की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और कमी से जूझ रहे हैं। उद्योग जगत ने सरकार से उत्पादकता बढ़ाने और निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है ताकि स्थानीय एमएसएमई (MSMEs) को बचाया जा सके।

  • कपास और सूत (yarn) की कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता से कपड़ा मिलों पर दबाव बढ़ा है।
  • चीन और बांग्लादेश से सूत की मांग बढ़ने के कारण घरेलू कीमतों में वृद्धि हुई है।
  • तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने कपास के निर्यात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
  • घरेलू उत्पादन (290 लाख गांठें) कुल आवश्यकता (350 लाख गांठें) से काफी कम है।

तमिलनाडु के कपड़ा हब, विशेष रूप से कोयंबटूर और तिरुप्पुर में स्थित कपड़ा मिलों और गारमेंट इकाइयों ने कपास की उपलब्धता और उत्पादकता में सुधार के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पिछले एक साल में कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ने छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) की कमर तोड़ दी है।

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सूत की मांग में अचानक वृद्धि कीमतों में अस्थिरता का मुख्य कारण है। 2023-24 के दौरान मांग काफी कम थी, लेकिन पिछले दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेषकर चीन और बांग्लादेश में सूत की मांग बढ़ी है, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव पड़ा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल आपूर्ति की समस्या नहीं है, बल्कि वैश्विक मांग और घरेलू उत्पादन के बीच का एक गंभीर असंतुलन है। जब कच्चा माल महंगा होता है, तो भारतीय गारमेंट इकाइयां अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं रह जातीं, जिससे ऑर्डर अन्य देशों या राज्यों में स्थानांतरित हो जाते हैं।

कीमतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो, साफ कपास की लैंडेड कीमतों में ₹70 की वृद्धि हुई है, जबकि सूत की कीमतों में पिछले एक साल में लगभग ₹95 प्रति किलोग्राम की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

"कच्चे माल की सुरक्षा के लिए पूरे उद्योग का ध्यान देश में कपास की उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए, अन्यथा हम आयात पर निर्भर रहेंगे।"

तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि कुछ बड़े स्पिनिंग मिल और व्यापारी कृत्रिम रूप से कपास की आपूर्ति को सीमित कर रहे हैं, जिससे कीमतों में हेरफेर हो रहा है। एसोसिएशन का तर्क है कि सरकार को कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना चाहिए ताकि स्थानीय निर्माताओं को राहत मिले।

विवरण आंकड़ा (लाख गांठें)
कुल वार्षिक आवश्यकता 350
वर्तमान घरेलू उत्पादन 290
आयातित मात्रा (शुल्क हटाने के बाद) 62

ऐतिहासिक रूप से, तमिलनाडु का पश्चिमी क्षेत्र कपड़ा उत्पादन का केंद्र रहा है, जो हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। हालांकि, वर्तमान संकट के कारण छोटे उद्यमियों के लिए परिचालन लागत असहनीय हो गई है, जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का खतरा पैदा हो गया है।

क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादकों में से एक है, फिर भी वैश्विक मांग और फसल की विफलता के कारण घरेलू मिलों को अक्सर कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कपास की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: चीन और बांग्लादेश से सूत की बढ़ती मांग और घरेलू उत्पादन का आवश्यकता से कम होना मुख्य कारण हैं।

p>प्रश्न 2: तिरुप्पुर एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की है?
उत्तर: उन्होंने कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है ताकि स्थानीय आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और कृत्रिम मूल्य वृद्धि को रोका जा सके।