गुजरात के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गुंटूर जिले में APCNF मॉडल का अध्ययन किया, जहाँ उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी। यह यात्रा रासायनिक खेती से टिकाऊ प्राकृतिक खेती की ओर सफल बदलाव को रेखांकित करती है।
- गुजरात प्रतिनिधिमंडल ने गुंटूर में रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर सफल बदलाव देखा।
- APCNF मॉडल ने फसल विविधता और किसानों की आय में वृद्धि का प्रदर्शन किया।
- अजोला का उपयोग और स्वदेशी बीजों का संरक्षण इस मॉडल के मुख्य चालक हैं।
गुजरात से आए 10 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले का विस्तृत दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आंध्र प्रदेश कम्युनिटी-मैनेज्ड नेचुरल फार्मिंग (APCNF) मॉडल का विश्लेषण करना था, जिसे कृषि को महंगे रासायनिक इनपुट से मुक्त करने और खेतों के पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
दौरे के दौरान, टीम ने ऋतु सशक्तिकरण संस्था (RySS) द्वारा समर्थित कई किसानों के साथ बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल ने परिदृश्य में एक स्पष्ट बदलाव देखा, जिसमें पारंपरिक रासायनिक खेती की तुलना में स्वस्थ फसल उपज और जैव विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह बदलाव केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक भी है, जो किसानों को आय के विविध स्रोत प्रदान कर रहा है।
क्षेत्रीय अवलोकन और सफलता की कहानियाँ
प्रतिनिधिमंडल ने पिडापर्थी में विजय कुमार के POP मॉडल का दौरा किया। मात्र 30 सेंट भूमि पर, कुमार लगभग 35 विभिन्न फसल और पौधों की किस्मों की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें ₹13,000 से ₹15,000 की मासिक आय हो रही है। यह मॉडल सूक्ष्म-जलवायु प्रबंधन और लाभकारी कीटों को आकर्षित करने के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में कार्य करता है।
मॉडल की प्रभावशीलता का और प्रमाण रत्नाकुमारी के ए-ग्रेड भिंडी मॉडल में देखा गया। इस प्लॉट में 10 से अधिक अंतर-फसलें और सीमाओं पर केले के बागान थे। पड़ोसी रासायनिक खेतों के साथ तुलना करने पर पाया गया कि प्राकृतिक खेती वाले प्लॉट में वायरस का प्रकोप और पत्तों का मुड़ना काफी कम था, जो प्राकृतिक प्रणालियों के लचीलेपन को साबित करता है।
अभिनव कीट और खरपतवार प्रबंधन
मुन्नांगी में, टीम ने मस्तान भि के पांच एकड़ के धान कॉम्पैक्ट ब्लॉक का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल खरपतवार के कम दबाव से विशेष रूप से प्रभावित था, जिसे अधिकारियों ने मिट्टी के संवर्धन और खरपतवार नियंत्रण के लिए अजोला (Azolla) के रणनीतिक उपयोग का परिणाम बताया। फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी प्लेट्स और एल-आकार के बंड प्लांटेशन का उपयोग एकीकृत कीट प्रबंधन के प्रति एक परिष्कृत दृष्टिकोण को दर्शाता है।
प्राकृतिक खेती की ओर संक्रमण केवल एक कृषि बदलाव नहीं है, बल्कि छोटे पैमाने के किसानों के लिए एक सामाजिक-आर्थिक मुक्ति है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि गुजरात और आंध्र प्रदेश के बीच यह अंतर-राज्यीय आदान-प्रदान टिकाऊ कृषि की आवश्यकता पर बढ़ते राष्ट्रीय consensus का संकेत है। जैसे-जैसे रासायनिक उर्वरक मिट्टी के क्षरण और बढ़ते कर्ज का कारण बन रहे हैं, APCNF मॉडल एक ऐसा स्केलेबल समाधान प्रदान करता है जो सिंथेटिक रसायन विज्ञान के बजाय मिट्टी के जीव विज्ञान को प्राथमिकता देता है। यह आंदोलन सामुदायिक प्रबंधन के माध्यम से भारत की खाद्य सुरक्षा रणनीति को पुनरपरिभाषित कर सकता है।
| विशेषता | रासायनिक खेती | APCNF प्राकृतिक खेती |
|---|---|---|
| लागत | उच्च (सिंथेटिक उर्वरक) | कम (खेत के अपने इनपुट) |
| जैव विविधता | कम (एकल फसल) | उच्च (मिश्रित खेती) |
| मिट्टी का स्वास्थ्य | गिरावट | सुधार/पुनर्योजी |
| कीट प्रतिरोधक क्षमता | कीटनाशकों पर निर्भर | प्राकृतिक लचीलापन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: APCNF मॉडल क्या है?
उत्तर 1: यह आंध्र प्रदेश में प्राकृतिक खेती का एक समुदाय-प्रबंधित दृष्टिकोण है जो जैविक इनपुट और जैव विविधता के पक्ष में सिंथेटिक रसायनों को समाप्त करता है।
प्रश्न 2: प्राकृतिक खेती से किसानों की आय कैसे बढ़ती है?
उत्तर 2: यह महंगे इनपुट की लागत को कम करता है और किसानों को एक ही प्लॉट से कई फसल किस्में (इंटरक्रॉपिंग) उगाने की अनुमति देता है, जिससे आय के कई स्रोत बनते हैं।