भारत के गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने शाओमी के बिजनेस मॉडल और विदेशी निवेश नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर विस्तृत जांच की सिफारिश की है।
- SFIO ने शाओमी के फंड ट्रांसफर और स्वामित्व ढांचे की जांच की सिफारिश की है।
- 2020 के चीनी निवेश नियमों के उल्लंघन पर मुख्य ध्यान।
- अमेज़न और फ्लिपकार्ट के साथ विशेष ई-कॉमर्स समझौतों की जांच होगी।
- भारतीय बाजार में शाओमी की हिस्सेदारी 19% से घटकर 13% रह गई है।
भारत के गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के व्यावसायिक संचालन में कथित अनियमितताओं और विदेशी निवेश नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर विस्तृत जांच की सिफारिश की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह सिफारिश एक सरकारी दस्तावेज़ के माध्यम से सामने आई है।
प्रस्तावित जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि फंड का मूवमेंट कैसे हुआ और क्या शाओमी ने 2020 में चीनी निवेशों पर सख्ती के बाद अनिवार्य सरकारी मंजूरी प्राप्त की थी। मई में तैयार किए गए इस ज्ञापन में शाओमी के विदेशी निवेशकों और समूह कंपनियों के स्वामित्व और नियंत्रण की जांच करने का प्रस्ताव है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियंत्रण में किसी भी बदलाव का उचित खुलासा किया गया था या नहीं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि भारत में चीनी टेक दिग्गजों पर बढ़ती सरकारी सख्ती का हिस्सा है। शाओमी पहले से ही 5,551 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज होने के संकट से जूझ रही है। यदि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा SFIO के 21-सूत्रीय ढांचे को मंजूरी मिलती है, तो कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
नियामक निगरानी से हटकर SFIO जांच की ओर बढ़ना यह संकेत देता है कि भारत सरकार अब विदेशी संस्थाओं के बाजार प्रभुत्व के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता दे रही है।
निवेश नियमों के अलावा, अमेज़न और फ्लिपकार्ट के माध्यम से शाओमी की ऑनलाइन बिक्री भी जांच के दायरे में है। छोटे ऑफलाइन विक्रेताओं ने आरोप लगाया है कि इन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं, जो भारत की विदेशी निवेश नीति (FDI) के खिलाफ है। SFIO यह जांच करेगा कि क्या शाओमी ने इन विक्रेताओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा हुआ था।
कंपनी की वित्तीय स्थिति भी चिंताजनक है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, शाओमी की बाजार हिस्सेदारी 19% से गिरकर 13% हो गई है, जिससे वह चौथे स्थान पर आ गई है। इसके अलावा, 2025 में भारत में इसका राजस्व 2.52 बिलियन डॉलर रहा, जो तीन साल पहले की तुलना में 40% कम है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2020 में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बाद, भारत सरकार ने 'प्रेस नोट 3' लागू किया था। इसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले किसी भी निवेश के लिए पूर्व सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इसका उद्देश्य रणनीतिक भारतीय संपत्तियों के अनुचित अधिग्रहण को रोकना था। हालांकि हाल ही में कुछ नियमों में ढील दी गई है, लेकिन पुराने अनुपालनों की जांच अभी भी जारी है।
| पैरामीटर | पिछली स्थिति | वर्तमान स्थिति (2025/26) |
|---|---|---|
| बाजार हिस्सेदारी | 19% | 13% (चौथा स्थान) |
| राजस्व रुझान | उच्च स्तर | 40% की गिरावट (3 वर्ष में) |
| नियामक स्थिति | सामान्य अनुपालन | SFIO जांच की सिफारिश |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या जांच आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है?
नहीं, SFIO ने केवल सिफारिश की है। अंतिम मंजूरी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से मिलना बाकी है।
प्रश्न 2: शाओमी की फ्रीज की गई संपत्तियों का क्या स्टेटस है?
अवैध प्रेषण (remittances) के आरोपों के कारण 2022 से शाओमी की लगभग 5,551 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज है।