सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि नाममात्र जीडीपी में गिरावट का मुख्य कारण अनौपचारिक क्षेत्र के लिए 'प्रॉक्सी' अनुमानों के बजाय वास्तविक डेटा का उपयोग करना है।
- नाममात्र जीडीपी में संशोधन मुख्य रूप से अनौपचारिक क्षेत्र के बेहतर मापन के कारण हुआ है।
- MoSPI ने कॉर्पोरेट प्रॉक्सी के स्थान पर ASUSE और PLFS सर्वेक्षणों के प्रत्यक्ष डेटा को अपनाया है।
- यह बदलाव 'अनुमानित' आर्थिक ट्रैकिंग से 'अनुभवजन्य' (empirical) ट्रैकिंग की ओर एक कदम है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव सौरभ गर्ग ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' के साथ एक साक्षात्कार में नाममात्र जीडीपी अनुमानों में नीचे की ओर किए गए संशोधन पर विस्तार से चर्चा की। 2022-23 से 2024-25 के बीच के आंकड़ों में आए इस बदलाव ने अर्थशास्त्रियों के बीच भारत की विकास दर की सटीकता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
इस विवाद की जड़ 2011-12 की पुरानी श्रृंखला से नई 2023-24 आधार-वर्ष श्रृंखला में संक्रमण है। गर्ग के अनुसार, पिछली प्रणाली में असंगठित क्षेत्र के लिए 'प्रॉक्सी-आधारित अनुमानों' का उपयोग किया जाता था। चूंकि नियमित सर्वेक्षण उपलब्ध नहीं थे, इसलिए MoSPI दशकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त 'प्रति श्रमिक मूल्यवर्धन' को कार्यबल की संख्या से गुणा करता था और फिर कॉर्पोरेट विकास दरों के आधार पर उसका अनुमान लगाता था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अब अपनी 'छाया अर्थव्यवस्था' (shadow economy) को अधिक गंभीरता से देख रहा है। कॉर्पोरेट प्रॉक्सी को छोड़ने का मतलब है कि सरकार यह स्वीकार कर रही है कि अनौपचारिक क्षेत्र हमेशा सूचीबद्ध कंपनियों की तरह विकास नहीं करता। इससे भविष्य की नीतियां केवल कॉर्पोरेट सफलता के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी उत्पादकता के आधार पर बनाई जाएंगी।
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम की आलोचनाओं का जवाब देते हुए, गर्ग ने स्पष्ट किया कि अब MoSPI त्रैमासिक आधार पर 'गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण' (ASUSE) और मासिक आधार पर 'आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण' (PLFS) का उपयोग कर रहा है। इससे पुराने डेटा का प्रभाव खत्म हो गया है और अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ रही है।
"जीडीपी एक अनुमान है; जब बेहतर डेटा उपलब्ध होता है, तो अनुमान बेहतर हो जाते हैं—इसे व्यवस्थित पूर्वाग्रह या अति-अनुमान कहना गलत होगा।"
सचिव ने 'डबल डिफ्लेशन' के लिए उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के उपयोग पर भी बात की। कुछ आलोचकों ने PPI डेटा की स्थिरता पर सवाल उठाए थे, लेकिन गर्ग ने बताया कि आधिकारिक लॉन्च से पहले वाणिज्य मंत्रालय के माध्यम से व्यापक प्रायोगिक संकलन किए गए थे ताकि डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
ऐतिहासिक रूप से, भारत 'अनौपचारिकता के जाल' से जूझता रहा है, जहाँ कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा औपचारिक टैक्स दायरे से बाहर होता है। वर्तमान में अनुभवजन्य डेटा की ओर बढ़ना राष्ट्रीय लेखांकन के अंतरराष्ट्रीय मानकों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
| विशेषता | पुरानी श्रृंखला (2011-12) | नई श्रृंखला (2023-24) |
|---|---|---|
| अनौपचारिक क्षेत्र डेटा | प्रॉक्सी-आधारित / अनुमानित | अनुभवजन्य / सर्वेक्षण-आधारित |
| डेटा स्रोत | दशकीय सर्वेक्षण और कॉर्पोरेट प्रॉक्सी | ASUSE (त्रैमासिक) और PLFS (मासिक) |
| मूल्य सूचकांक | WPI-केंद्रित | PPI (उत्पादक मूल्य सूचकांक) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या कम नाममात्र जीडीपी का मतलब है कि अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है?
नहीं, इसका मतलब है कि पिछले अनुमान उन प्रॉक्सी पर आधारित थे जिन्होंने अनौपचारिक क्षेत्र की वृद्धि को अधिक दिखाया था; वर्तमान आंकड़े वास्तविकता के अधिक करीब हैं।
प्रश्न 2: जीडीपी गणना में ASUSE की क्या भूमिका है?
ASUSE गैर-निगमित उद्यमों पर प्रत्यक्ष डेटा प्रदान करता है, जिससे MoSPI को कॉर्पोरेट रुझानों के आधार पर अनुमान लगाने के बजाय अनौपचारिक क्षेत्र की वास्तविक उत्पादकता मापने में मदद मिलती है।