अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2026 तक भारत में कोयले की मांग 1,353 मिलियन टन तक पहुंच सकती है। घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की सरकारी रणनीति से उत्पादन नए शिखर पर पहुंचने की उम्मीद है।

  • 2026 तक कोयले की मांग में 4.2% की वृद्धि का अनुमान, कुल मांग 1,353 MT तक पहुंचेगी।
  • घरेलू उत्पादन 1,095 MT के नए रिकॉर्ड स्तर को छूने की संभावना है।
  • कोयला आयात में कमी आने का अनुमान है, लेकिन 2027 में मेटालर्जिकल कोयले की मांग बढ़ सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की नवीनतम मध्य-वर्ष रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयले की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में भारत में कोयले की मांग साल-दर-साल 4.2% बढ़कर 1,353 मिलियन टन (MT) हो सकती है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत का घरेलू उत्पादन भी 1,095 MT के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।

IEA ने इस वृद्धि का मुख्य कारण भारत सरकार की वह रणनीति बताया है जिसके तहत घरेलू आपूर्ति को मजबूत कर आयात पर निर्भरता को कम किया जा रहा है। सरकार का ध्यान न केवल उत्पादन बढ़ाने पर है, बल्कि खदानों के पिटहेड्स पर उपलब्ध स्टॉक का कुशलतापूर्वक उपयोग करने पर भी है।

मांग में वृद्धि के प्रमुख कारण

एजेंसी के अनुसार, अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) की क्षमता बढ़ने के बावजूद, बिजली की कुल मांग में भारी उछाल आया है। इसके अलावा, El Niño की स्थिति के कारण तापमान बढ़ने से कूलिंग (AC और कूलर) की मांग बढ़ेगी और जलविद्युत (Hydropower) की उपलब्धता कम होने से कोयले पर दबाव बढ़ेगा।

औद्योगिक क्षेत्र में भी मांग मजबूत बनी हुई है। विशेष रूपपिग आयरन, डायरेक्ट रिडक्शन ऑफ आयरन (DRI) और सीमेंट उत्पादन जैसे बड़े क्षेत्रों में कोयले की खपत बढ़ने का अनुमान है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण यह दर्शाता है कि भारत एक कठिन संतुलन बना रहा है। एक तरफ देश नेट-जीरो लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयले पर इसकी निर्भरता अभी भी गहरी है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि भारत के लिए 'ऊर्जा संक्रमण' (Energy Transition) एक धीमी और चरणबद्ध प्रक्रिया होगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला के कुशल प्रबंधन और आयात विविधीकरण में निहित है।

उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 1,047 MT और वित्त वर्ष 2025-26 में 1,040.08 MT कोयले का उत्पादन किया था। हालांकि, IEA ने नोट किया कि वर्तमान में पिटहेड पर उच्च इन्वेंट्री के कारण उत्पादन की गति कुछ धीमी हुई है। Coal India Ltd, जो देश के तीन-चौथाई उत्पादन के लिए जिम्मेदार है, ने मई में कम उत्पादन दर्ज किया क्योंकि वह मौजूदा स्टॉक से मांग पूरी कर रहा था।

विवरण भारत (2026 अनुमान) वैश्विक (2026 अनुमान)
मांग वृद्धि +4.2% +1.2%
कुल मांग/उत्पादन 1,353 MT (मांग) 8.94 BT (मांग)
उत्पादन प्रवृत्ति रिकॉर्ड वृद्धि 2% की गिरावट

आयात के मोर्चे पर, IEA का अनुमान है कि भारत का कोयला आयात 2025 के 167 MT से गिरकर 2026 में 160 MT रह जाएगा। हालांकि, 2027 में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल (Metallurgical Coal) की मांग बढ़ सकती है क्योंकि स्टील उत्पादन का विस्तार हो रहा है और घरेलू स्तर पर इसकी उपलब्धता सीमित है।

क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादकों में से एक है, और इसकी बिजली उत्पादन क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी थर्मल पावर प्लांट पर निर्भर है।

Frequently Asked Questions

1. भारत में कोयले की मांग बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में बिजली की बढ़ती मांग, El Niño के कारण कूलिंग की जरूरत और सीमेंट व स्टील जैसे उद्योगों का विस्तार शामिल है।

2. क्या भारत कोयले का आयात कम करेगा?
हाँ, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और स्टॉक प्रबंधन के कारण 2026 तक आयात में कमी आने की उम्मीद है, हालांकि स्टील उद्योग के लिए विशिष्ट कोयले का आयात जारी रहेगा।