हैदराबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 41.7% तक पहुँच गई है, लेकिन वेंचर कैपिटल फंडिंग और बोर्डरूम नेतृत्व में वे अब भी संघर्ष कर रही हैं।
- भारत में महिला श्रम बल भागीदारी 2017-18 के 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% हो गई है।
- वैश्विक स्तर पर महिला-संस्थापक टीमों को केवल 2.3% वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त हुई है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि 'विकसित भारत' का लक्ष्य महिलाओं को केवल नौकरी देने से नहीं, बल्कि नेतृत्व पदों पर बैठाने से पूरा होगा।
हैदराबाद के हाईटेक सिटी में फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FTCCI) द्वारा आयोजित 'महिला सशक्तिकरण - समावेशी विकास और नेतृत्व को बढ़ावा देना' विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका पर गहन चर्चा की गई। सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्यमियों और निवेशकों ने इस बात पर जोर दिया कि संख्यात्मक वृद्धि के बावजूद, गुणात्मक नेतृत्व में अभी बहुत काम करना बाकी है।
FTCCI की महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्ष डॉ. तस्नीम शरीफ ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर महिला-संस्थापक टीमों को 2024 में कुल निवेश का केवल 2.3% ($6.7 बिलियन) मिला। यदि यही रफ्तार रही, तो फंडिंग में समानता आने में साल 2065 तक का समय लग सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भागीदारी पर्याप्त नहीं है; महिलाओं को बोर्डरूम, निर्यात और निवेश निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभानी होगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का आर्थिक ढांचा अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ 'जेंडर डाइवर्सिटी' केवल एक सामाजिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक आर्थिक अनिवार्यता बन गई है। जब तक पूंजी का प्रवाह महिला उद्यमियों की ओर नहीं बढ़ता, तब तक नवाचार (Innovation) की गति सीमित रहेगी।
"विकसित भारत संभव नहीं है यदि आधी मानव पूंजी का कम उपयोग किया जाए; अगला कदम महिलाओं को केवल नौकरियों में नहीं, बल्कि आर्थिक नेतृत्व में लाना है।"
MSME विकास और सुविधा कार्यालय के संयुक्त निदेशक सी.एस.एस. राव ने सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए 'प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट' योजना के तहत 100% प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। साथ ही, ZED सर्टिफिकेशन भी मुफ्त उपलब्ध है, जो विनिर्माण क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर है।
दिग्गज अभिनेत्री और उद्यमी अमला अकिनेनी ने महिलाओं को छोटे स्तर से शुरुआत करने और शिक्षा व सामाजिक कार्यों के माध्यम से बदलाव का एजेंट बनने के लिए प्रेरित किया। वहीं, ग्रैन्यूल्स इंडिया की कार्यकारी निदेशक उमा देवी चिगुरुपति ने कहा कि समावेशिता का अर्थ रियायत देना नहीं, बल्कि निष्पक्षता और समान अवसर प्रदान करना है।
| विवरण | 2017-18 | 2023-24 |
|---|---|---|
| महिला श्रम बल भागीदारी (भारत) | 23.3% | 41.7% |
| फंडिंग स्थिति (वैश्विक) | अत्यधिक कम | केवल 2.3% (2024) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: महिला उद्यमियों के लिए ZED सर्टिफिकेशन क्या है?
उत्तर: यह एक प्रमाणन है जो विनिर्माण इकाइयों की गुणवत्ता और स्थिरता को बढ़ाता है, और महिला स्वामित्व वाली इकाइयों के लिए यह वर्तमान में निःशुल्क है।
प्रश्न 2: फंडिंग गैप का महिलाओं के नेतृत्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: पूंजी की कमी के कारण महिला उद्यमी अपने व्यवसायों को स्केल नहीं कर पातीं, जिससे वे बोर्डरूम और शीर्ष नेतृत्व पदों से दूर रह जाती हैं।